अंबाला: जेल की रोटी का नाम सुनते ही आमतौर पर सजा और जेल की सलाखों का ख्याल आता है, लेकिन हरियाणा में अब लोग बिना जेल गए भी ‘जेल की रोटी’ का स्वाद चख सकेंगे। हरियाणा जेल विभाग ने कैदियों के हाथ से तैयार होने वाले भोजन को आम लोगों तक पहुंचाने की योजना तैयार की है। इसकी शुरुआत अंबाला सेंट्रल जेल से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी।
जेल के बाहर कैंटीन में मिलेगा खाना
योजना के तहत अंबाला सेंट्रल जेल के बाहर बनाई गई कैंटीन में आम नागरिकों को कैदियों द्वारा तैयार भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस खाने को ‘जेल की रोटी’ नाम दिया गया है। शुरुआत में कैंटीन के जरिए इसकी बिक्री होगी।
योजना सफल रहने पर इसे होम डिलीवरी से जोड़ने की भी तैयारी है। जेल विभाग की ओर से इसके लिए फ्लिपकार्ट के साथ एमओयू (समझौता) किए जाने की बात कही गई है। अंबाला में प्रयोग सफल होने के बाद इसे प्रदेश की दूसरी जेलों की कैंटीन तक भी विस्तार देने की योजना है।
थाली में दाल, सब्जी, रोटी, चावल और दही
‘जेल की रोटी’ के तहत लोगों को वही भोजन उपलब्ध कराने की योजना है, जो जेल में कैदियों के लिए तैयार किया जाता है। इसमें दाल, सब्जी, रोटी, चावल और दही शामिल होंगे। विभाग का दावा है कि भोजन तैयार करने में अच्छी गुणवत्ता वाले अनाज, मसाले और सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है।
जेल मैनुअल के मुताबिक कैदियों को प्रतिदिन निर्धारित मात्रा में आटा, चावल, सब्जियां, दाल और दही उपलब्ध कराया जाता है। विभाग का कहना है कि भोजन में मिलावट की गुंजाइश न रहे, इसके लिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
लागत का सिर्फ 10 प्रतिशत लिया जाएगा
इस पहल की खास बात यह है कि आम लोगों को भोजन की लागत का केवल करीब 10 प्रतिशत ही देना होगा। यानी कम कीमत में जेल में तैयार भोजन का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। मांग बढ़ने और व्यवस्था सुचारु रूप से चलने पर रोजाना तैयार होने वाले पैकेटों की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है।
छत्तीसगढ़ से मिली योजना की प्रेरणा
हरियाणा जेल विभाग ने इस पहल के लिए छत्तीसगढ़ के मॉडल से भी प्रेरणा ली है। रायपुर सेंट्रल जेल में पहले से जेल में तैयार खाद्य सामग्री को आम लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी तर्ज पर हरियाणा में भी कैदियों द्वारा तैयार भोजन को जेल की चारदीवारी से बाहर लाने की तैयारी है।
कमाई से कैदियों के पुनर्वास पर होगा काम
जेल विभाग के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य व्यावसायिक मुनाफा कमाना नहीं है। इसके पीछे कैदियों को काम से जोड़ना, उन्हें खाना बनाने जैसे हुनर सिखाना और रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार करना मुख्य लक्ष्य है। भोजन की बिक्री से होने वाली आय का इस्तेमाल कैदियों के कल्याण, स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) और सुधारात्मक गतिविधियों में किया जाएगा।
विभाग का मानना है कि इससे कैदियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे जेल से बाहर निकलने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
जेल की ब्रेड के बाद अब ‘जेल की रोटी’
हरियाणा के जेल महानिदेशक ए.एस. चावला के अनुसार, आम लोगों की ओर से जेल में तैयार ब्रेड की काफी मांग सामने आई है। इसी रुचि को देखते हुए अब कैदियों द्वारा तैयार भोजन को भी जनता के लिए उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। योजना की शुरुआत अंबाला से होगी और सफल होने पर इसे प्रदेश की अन्य जेलों तक ले जाने की तैयारी है। यानी आने वाले दिनों में ‘जेल की रोटी’ खाने के लिए जेल की सजा नहीं, बस कैंटीन तक पहुंचना होगा।
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