मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में 'जल संरक्षित हरियाणा' परियोजना को विश्व बैंक से 4000 करोड़ की मंजूरी मिली है। इससे जल संकट का दीर्घकालिक समाधान होगा।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी मार्गदर्शन में हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। 5,714 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के लिए विश्व बैंक द्वारा 4,000 करोड़ रुपये के ऋण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश में जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जल संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर कहा कि ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों और बढ़ती जल मांग को देखते हुए जल संरक्षण अब केवल आवश्यकता नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुका है। ऐसे में यह परियोजना जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और संरक्षण के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल हरियाणा को जल-आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में “मील का पत्थर” साबित होगी, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सतत जल भविष्य सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगी। इसके माध्यम से जल संरक्षण संबंधी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने, भूजल स्तर सुधारने, जल उपयोग दक्षता बढ़ाने तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने का कार्य किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस परियोजना से प्रदेश में जल संकट की चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान विकसित होगा और कृषि, उद्योग तथा आम नागरिकों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह पहल हरियाणा को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को प्रदेश के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।