कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़: हरियाणा के सातवें दशक में प्रवेश के साथ प्रदेश सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों को आर्थिक विकास का नया आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को करनाल में हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 लॉन्च की। सरकार ने इस नीति के तहत अगले पांच वर्षों में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का विनिर्माण निवेश आकर्षित करने, 5 लाख से अधिक नए रोजगार पैदा करने और वर्ष 2031 तक प्रदेश के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

नई नीति में वित्त, औद्योगिक ढांचा, तकनीक, नवाचार, निर्यात, पर्यावरणीय स्थिरता और कौशल विकास से जुड़ी 60 प्रमुख पहल शामिल की गई हैं। सरकार का फोकस केवल नए उद्योग स्थापित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौजूदा एमएसएमई को विस्तार देने, उनका आधुनिकीकरण करने और उन्हें घरेलू तथा वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर भी रहेगा।

एमएसएमई के लिए बनेगा अलग निदेशालय

नीति के तहत प्रदेश में समर्पित एमएसएमई निदेशालय स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य के करीब 15 लाख एमएसएमई को संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है। निदेशालय के माध्यम से उद्योगों को निवेश, आधुनिक तकनीक, वित्त, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और बाजार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

पुराने उद्योगों के विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई नीति का उद्देश्य सिर्फ नए उद्योग लगाना नहीं है। पहले से चल रहे उद्योगों को विस्तार देने और उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

हरियाणा उद्यम विकास मिशन के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एमएसएमई को पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन सहायता और बीमा सहायता जैसे प्रोत्साहन दिए जाएंगे। परीक्षण, स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुसंधान एवं विकास के लिए भी सहायता का प्रावधान किया गया है।

वित्त की समस्या दूर करने और बिना जमानत ऋण को बढ़ावा देने के लिए राज्य वेंचर कैपिटल फंड और सेक्टोरल क्रेडिट गारंटी फंड प्रस्तावित किए गए हैं।

2031 तक निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य

सरकार हरियाणा के एमएसएमई को स्थानीय बाजार से निकालकर वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण एवं बीमा, माल ढुलाई सहायता, ई-कॉमर्स पंजीकरण और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी के लिए सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री प्रथम निर्यातक प्रोत्साहन योजना के तहत पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय खरीदार तलाशने और पहला कारोबार हासिल करने की लागत में सहायता दी जाएगी।

वहीं हरियाणा निर्यात केंद्र निर्यात दस्तावेज, नियमों के पालन, लॉजिस्टिक्स, बाजार की जानकारी और विदेशी खरीदारों से संपर्क के लिए एकल मंच के रूप में काम करेगा।

बड़े क्लस्टर और प्लग एंड प्ले औद्योगिक एस्टेट होंगे विकसित

औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े क्लस्टर, प्लग एंड प्ले औद्योगिक एस्टेट और कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा, ताकि उद्योग लगाने में लगने वाला समय, लागत और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता कम हो।

इसके साथ एमएसएमई राइट टू बिजनेस फ्रेमवर्क लागू करने की भी योजना है, जिसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

एआई से मिलेगी उद्योगों को योजनाओं की जानकारी

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर पर एआई आधारित बहुभाषी ‘हरियाणा उद्योग साथी’ भी लॉन्च किया। इसके माध्यम से उद्यमी सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहनों, पात्रता, जरूरी दस्तावेजों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आवाज या टेक्स्ट के जरिए हासिल कर सकेंगे।

यह प्लेटफॉर्म हिंदी, अंग्रेजी, हिंग्लिश, हरियाणवी और पंजाबी में सहायता देगा। इसमें एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 के साथ कृषि-व्यवसाय एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 की जानकारी भी उपलब्ध होगी।

एआई, इंडस्ट्री 4.0 और आधुनिक तकनीक पर जोर

हरियाणा के उद्योगों को भविष्य की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए इंडस्ट्री 4.0, एआई, स्वचालन, उन्नत विनिर्माण, गुणवत्ता प्रमाणन और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने और उद्योगों तथा शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करने की योजना है।

हरित और समावेशी उद्योगों को भी मिलेगा बढ़ावा

नीति में हरित विकास को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। स्वच्छ उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, संसाधन दक्षता और चक्रिय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम लगाने के लिए सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा समर्पित ग्रीन इन्वेस्टमेंट फंड प्रस्तावित किया गया है।

महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर उद्यमियों, पूर्व सैनिकों, अग्निवीरों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को भी विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है।

सरकार का दावा है कि 60 पहलों वाली यह पांच वर्षीय नीति हरियाणा को मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इसके जरिए रोजगार, निवेश और निर्यात बढ़ाने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप नई गति देने का प्रयास किया जाएगा।

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