हरियाणा शिक्षा विभाग ने राइट टू एजुकेशन नियमों का पालन न करने और जरूरी दस्तावेज न सौंपने पर 1107 निजी स्कूलों को ब्लैकलिस्ट किया है। इस कार्रवाई के तहत इन स्कूलों की ऑनलाइन दाखिला प्रक्रिया और एमआईएस पोर्टल पर रोक लगा दी गई है।
फरीदाबाद। हरियाणा में राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट-2009 के नियमों की अवहेलना करने और निर्धन वर्ग के बच्चों को दाखिला न देने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में प्रदेश के 1107 प्राइवेट स्कूलों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने इन सभी संस्थानों की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए इनकी मान्यता रद्द करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है आरटीई प्रावधान
शिक्षा का अधिकार कानून देश में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। इस अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी शुरुआती कक्षा (नर्सरी, केजी या पहली) में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित समूह (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इन छात्रों की फीस का वहन तय नियमों के तहत सरकार द्वारा किया जाता है।
जांच में खुली पोल
शिक्षा निदेशालय द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई कि राज्य के 22 जिलों में संचालित 1107 स्कूल मान्यता से जुड़े आवश्यक कागजात पेश करने में असफल रहे और वहां आरटीई नियमों की गंभीर अनदेखी की जा रही थी। इसके बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इन स्कूलों का ऑनलाइन एमआईएस पोर्टल बंद कर दिया है और नए दाखिले लेने के अधिकार पर रोक लगा दी है। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर कैथल, गुरुग्राम और हिसार जिलों में देखा गया है, जबकि फरीदाबाद के भी लगभग 70 स्कूल इसकी जद में आए हैं।
विभाग की सख्त चेतावनी
फरीदाबाद के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बसंत कुमार ढिल्लों ने बताया कि ब्लैकलिस्ट किए गए स्कूलों से दाखिला कराने की शक्तियां छीन ली गई हैं। शिक्षा विभाग वर्तमान में इस बात की निगरानी कर रहा है कि इन संस्थानों में अब कोई नया छात्र पंजीकरण न कराए, साथ ही पहले से प्रवेश ले चुके बच्चों के भविष्य को लेकर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने सचेत किया कि सीटों की जानकारी छिपाने या आरटीई नियमों को न मानने वाले स्कूलों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई होगी।
स्कूल संघ का विरोध
दूसरी तरफ, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि निजी संस्थान आरटीई के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि तकनीकी खामियों, दस्तावेज सत्यापन और पोर्टल की गड़बड़ियों के कारण कई जगह दाखिले पूरे नहीं हो पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई वर्षों से आरटीई के तहत दी जाने वाली फीस की प्रतिपूर्ति समय पर नहीं कर रही है, जिससे स्कूलों पर वित्तीय संकट गहरा गया है। संघ ने मांग की है कि ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई से पहले प्रत्येक स्कूल का पक्ष सुना जाना चाहिए।

