कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में बेटियों के जन्म के आंकड़ों ने एक बार फिर सरकार और समाज की चिंता बढ़ा दी है। साल 2025 में जो लिंगानुपात सुधार के साथ 923 तक पहुंच गया था, वह जून 2026 तक आते-आते महज 6 महीनों में 23 अंक गिरकर 900 पर आ गया है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति सिंह द्वारा रखे गए जिला-वार आंकड़ों से यह बड़ा खुलासा हुआ है।

लिंगानुपात के मामले में करनाल 945 के स्कोर के साथ प्रदेश में सबसे अव्वल (शीर्ष) पर रहा, जबकि चरखी दादरी महज 829 के आंकड़े के साथ सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है।

प्रमुख शहरों का हाल
जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, महेंद्रगढ़ का लिंगानुपात 869, गुरुग्राम और झज्जर का 871-871, जींद का 878 तथा पानीपत का आंकड़ा गिरकर 880 रह गया है।

इन जिलों की स्थिति बेहतर
पलवल (930), फरीदाबाद (920), नूंह (918) और फतेहाबाद (917) जैसे जिलों ने तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है।

कानूनी कार्रवाई
कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है। पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) और एमटीपी (MTP) एक्ट के तहत अब तक 1,422 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग में खाली पड़े हैं पद
एक तरफ जहां जमीनी आंकड़े चिंताजनक हैं, वहीं दूसरी तरफ बाल अधिकारों की रक्षा करने वाला ‘हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ खुद स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। आयोग में अध्यक्ष का पद तो भरा हुआ है, लेकिन दिसंबर 2025 से सदस्यों के 15 में से 6 पद खाली चल रहे हैं। योग्य आवेदन न मिलने के कारण पिछला विज्ञापन रद्द कर अब नया विज्ञापन जारी किया गया है।

वर्तमान में आयोग की कोई अलग वेबसाइट नहीं है, और शिकायतें विभाग के पोर्टल, ई-मेल या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के जरिए ली जा रही हैं।

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