हकृवि ने मूंग की किस्मों एमएच 1142 और एमएच 1762 के बीज उत्पादन के लिए हेमट्रिक्स एग्रीटेक के साथ एमओयू साइन किया है। इससे किसानों को प्रमाणित बीज मिल सकेगा।
विनोद सैनी, हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) द्वारा विकसित मूंग की उन्नत किस्मों की बढ़ती मांग को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज के मार्गदर्शन में तकनीकी व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने रुद्रपुर, उत्तराखंड की हेमट्रिक्स एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मूंग की उन्नत किस्मों एमएच 1142 और एमएच 1762 के बीजों का बड़े स्तर पर उत्पादन कर उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों के किसानों तक सुलभ कराना है, ताकि उनकी फसल की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।
किसानों को मिलेगा प्रमाणित उन्नत बीज
कुलसचिव डॉ. पवन कुमार ने बताया कि इस साझेदारी के तहत कंपनी विश्वविद्यालय को लाइसेंस फीस का भुगतान करेगी, जिसके बदले में उसे इन किस्मों के बीज उत्पादन और विपणन (Marketing) का अधिकार प्राप्त होगा। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग और हेमट्रिक्स एग्रीटेक के जोनल मैनेजर बीएन मिश्रा ने इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. रमेश यादव के अनुसार, यह प्रयास किसानों को विश्वसनीय बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल है। अब किसानों को बाजार में नकली बीजों के बजाय प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत बीज मिल सकेंगे, जिससे उनकी खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
उन्नत किस्मों की प्रमुख विशेषताएं
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए अनुशंसित मूंग किस्म ‘एमएच 1142’ अपनी कम फैलावदार और सीधी बढ़वार के कारण कटाई में अत्यंत सुलभ है। यह किस्म 63 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 12 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देती है। वहीं, ‘एमएच 1762’ किस्म पीला मोज़ैक रोग के प्रति प्रतिरोधी है और वसंत एवं ग्रीष्म काल के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। यह किस्म लगभग 60 दिनों में पक जाती है और अन्य प्रचलित किस्मों की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक अधिक उपज देती है। इस मौके पर डॉ. वीरेन्द्र मोर, डॉ. योगेश जिंदल समेत कई वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद रहे।

