Kishangarh Marble Industry Crisis: एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी किशनगढ़ इस वक्त अंतरराष्ट्रीय युद्ध और कच्चे माल की किल्लत से कराह रही है। कभी चौबीसों घंटे ट्रकों की गूंज से दहकने वाली यह मंडी अब सुस्ती की मार झेल रही है। हालात ये हैं कि मंडी का रोजाना का टर्नओवर आधा रह गया है, जिससे सीधे तौर पर 70 हजार श्रमिकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

25 करोड़ से 12 करोड़ पर सिमटा धंधा
मार्बल व्यापारियों से मिली जानकारी के अनुसार, जमीनी हकीकत काफी डरावनी है। मार्बल व्यापारी सर्वेश्वर राठी ने बताया कि पहले रोजाना करीब 500 ट्रक लोड होते थे, जो अब घटकर सिर्फ 300 रह गए हैं। मंडी का जो डेली कारोबार 25 करोड़ रुपये था, वह अब गिरकर महज 12 करोड़ पर सिमट गया है। बिहार, बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों से आने वाली डिमांड में भी भारी कमी आई है।
ईरान-इराक की जंग और महंगी हुई पॉलिश
दरअसल, किशनगढ़ में ईरान, तुर्की और इटली जैसे 40 देशों से पत्थर आता है। जंग के चलते ईरान से आने वाला खास मार्बल पूरी तरह बंद हो गया है। पत्थर को चमकाने वाले एपॉक्सी और केमिकल के दाम 30 से 40% बढ़ गए हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने रही-सही कसर पूरी कर दी है, जिससे माल भाड़ा आसमान छू रहा है।
एसोसिएशन और व्यापारियों के बीच अलग राय
गौरतलब है कि इस संकट पर मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर जैन का नजरिया थोड़ा अलग है। उनका कहना है कि स्थिति उतनी भयावह नहीं है और वियतनाम व तुर्की से सप्लाई जारी है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि शिपमेंट में देरी हो रही है। लेकिन दूसरी तरफ, व्यापारी लक्ष्मी नारायण जैसे लोग इसे ‘दोहरी मार’ बता रहे हैं और केंद्र सरकार से कोरोना काल जैसी राहत की मांग कर रहे हैं।
70 हजार घरों में चूल्हा बुझने का डर
सूत्रों ने बताया कि किशनगढ़ मार्बल उद्योग से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है। एक शोरूम या कटर मशीन के पीछे 100 से ज्यादा एजेंसियां और मजदूर काम करते हैं। अगर लोडिंग इसी तरह 50% पर टिकी रही, तो आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर छंटनी की नौबत आ सकती है।
मार्बल महंगा होने का सीधा असर अब उन लोगों पर पड़ेगा जो अपना घर बनवा रहे हैं। इटालियन और इंपोर्टेड मार्बल के दाम 20 से 25% तक बढ़ चुके हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ और एमपी जैसे राज्यों में भी किशनगढ़ से माल जाता है, सप्लाई चैन टूटने से वहां भी कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ना तय है।
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