गया। झारखंड के हजारीबाग जिले से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है, जहां शनिवार की शाम एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के छह सदस्यों की जान चली गई। गया जिले के रहने वाले ये सभी लोग कार से अपने गांव लौट रहे थे, तभी चौपारण थाना क्षेत्र के दनुआ जंगल स्थित घाटी में उनकी कार अनियंत्रित होकर लगभग 30 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसा इतना भयानक था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

​कैसे हुआ हादसा?

​जानकारी के अनुसार, हादसा शाम के वक्त हुआ जब विजिबिलिटी कम थी। सड़क से गुजर रहे एक राहगीर की नजर जब नीचे खाई में पड़ी कार पर गई, तब इस घटना का खुलासा हुआ। राहगीर ने तुरंत स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों को सूचित किया। पुलिस जब तक मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तब तक कार में मौजूद सभी छह लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। आशंका जताई जा रही है कि दनुआ घाटी के खतरनाक मोड़ पर संतुलन बिगड़ने की वजह से कार रेलिंग तोड़ते हुए नीचे जा गिरी।

​मृतकों की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि

​इस हादसे में मारे गए लोग गया जिले के आमस थाना क्षेत्र के तेतरिया और मसूरी गांव के निवासी थे। मृतकों की सूची इस प्रकार है:

  • ​शिव कुमार मांझी (43 वर्ष): परिवार के मुखिया, जो धनबाद की कोलियरी में कार्यरत थे।
  • ​रूबी देवी (38 वर्ष): शिव कुमार मांझी की पत्नी।
  • ​सोनी कुमारी (13 वर्ष) और सोहानी कुमारी (12 वर्ष): शिव कुमार की दो बेटियां।
  • ​कृत मांझी (60 वर्ष): शिव कुमार के ससुर।
  • ​प्रेम कुमार (10 वर्ष): कृत मांझी का पोता।

​बीमार ससुर को घर छोड़ने आ रहे थे शिव

​स्थानीय पैक्स अध्यक्ष उदय यादव ने बताया कि शिव कुमार मांझी को बीएसएनएल में अनुकंपा पर नौकरी मिली थी और वे वर्तमान में झरिया (धनबाद) में रह रहे थे। उनके ससुर कृत मांझी पिछले दो महीनों से बीमार थे और इलाज के लिए शिव के पास ही रह रहे थे। ससुर के स्वस्थ होने के बाद शिव उन्हें वापस उनके गांव आमस छोड़ने आ रहे थे। इसके साथ ही उन्हें गुरुआ के बरवाडीह गांव में अपनी फुआ के घर एक शादी समारोह में भी शामिल होना था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

​पीछे रह गया इकलौता बेटा

​इस तबाही के बाद परिवार में अब केवल 14 साल का बेटा रंजीत कुमार बचा है। रंजीत ने हाल ही में मैट्रिक की परीक्षा पास की है और वह इस समय धनबाद में ही है। परिजनों ने अब तक उसे इस खबर की जानकारी नहीं दी है। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस मासूम बच्चे के भविष्य को लेकर चिंतित है।

​प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया

​बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. संतोष सुमन ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने इसे एक हृदयविदारक घटना बताते हुए कहा कि ‘हम’ पार्टी पीड़ित परिवार की हर संभव सहायता करेगी। उन्होंने झारखंड प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि दनुआ घाटी में सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी है। वहां न तो पर्याप्त रेलिंग है और न ही चेतावनी बोर्ड, जिसके कारण आए दिन ऐसे हादसे होते रहते हैं।