हकिमुददीन नासिर, महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गई है। झलप स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। कागजों में चिकित्सकों की पदस्थापना होने के बावजूद अस्पताल का संचालन ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।हालत यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।

महासमुंद मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के किनारे स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र झलप 20 बिस्तरों वाला अस्पताल है। इस अस्पताल पर आसपास के लगभग 80 गांवों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं निर्भर हैं। अस्पताल में एक चिकित्सा अधिकारी और दो रजिस्टर्ड मेडिकल असिस्टेंट के पद स्वीकृत हैं। दस्तावेजों में एक चिकित्सा अधिकारी और एक आरएमए पदस्थ हैं, लेकिन चिकित्सा अधिकारी पिछले तीन महीनों से पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर हैं, जबकि आरएमए दो माह से संतान पालन अवकाश पर हैं। एक अन्य आरएमए को पूर्व में यहां अटैच किया गया था, जिसे अब उसकी मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेज दिया गया है।

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ग्रामीणों पर बढ़ा अतिरिक्त आर्थिक बोझ

वर्तमान में अस्पताल में न तो डॉक्टर हैं और न ही आरएमए। पूरा अस्पताल दो ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर मामलों तक के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ और समय की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कलेक्टर ने वैकल्पिक व्यवस्था करने के दिए निर्देश

इस मामले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जब एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति है तो जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति क्या होगी। महासमुंद जिले में 222 उप स्वास्थ्य केंद्र, 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और एक जिला अस्पताल संचालित हैं। ऐसे में झलप अस्पताल की यह तस्वीर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।

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