कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आरक्षण के पक्ष में कई दलीलें, पुरानी रिपोर्ट और आंकड़े पेश किए गए, जिस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
2019 में ही खत्म हो गई थी 50% आरक्षण की सीमा
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मध्य प्रदेश में आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा साल 2019 में ही खत्म हो चुकी है। EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण लागू होने के साथ ही यह सीमा टूट गई थी। सरकार का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के.एम. नटराजन ने तर्क दिया कि जनसंख्या ही आरक्षण का प्रमुख आधार है और 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी 51 प्रतिशत है। सरकार की ओर से 1983 की महाजन कमीशन रिपोर्ट तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बढ़ाए गए आरक्षण का बचाव किया गया।
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2019 के बाद का डेटा स्वीकार नहीं
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर सवाल उठाया कि क्या केवल इस तरह के डेटा के आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है? अदालत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि- साल 2019 से पहले ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के लिए क्या कोई जमीनी यानी फील्ड वर्क (समीक्षा) किया गया था? साल 2019 के बाद की किसी भी रिपोर्ट या डेटा को कोर्ट द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। चूंकि सरकार ने महाजन कमीशन और डॉ. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी की जो भी रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं, वे साल 2000 के बाद की हैं, इसलिए कोर्ट ने इस पर विस्तार से सवाल-जवाब किए।
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पिछड़े वर्गों को उनका हक और अधिकार दिलाया जाएगा
बीजेपी प्रवक्ता अजय यादव ने मामले को लेकर कहा कि- मध्यप्रदेश में कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने पिछड़े वर्गों को आरक्षण के नाम पे धोखा दिया। एक कमजोर कानून लेकर आए जो न्यायालय में जाकर स्थगन मिल गया। कभी भी प्रदेश में 27 फीसदी आरक्षण लागू नहीं हो पाया। भारतीय जनता पार्टी सरकार बनने के बाद न्यायालय में पिछड़े वर्गों के हक और अधिकार की लड़ाई मजबूती से लड़ी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के पिछड़े वर्गों को उनका हक और अधिकार दिलवाया जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने पिछड़े वर्गों को छलावा दिया जिस वजह से न्यायालय में जाके अड़चन आई है। अब न्यायालय में जिस तरह से सरकार की तरफ से पक्ष रखा जा रहा है, जल्द ही पिछड़े वर्गों को उनका पूरा अधिकार मिलेगा और सरकार की इच्छाशक्ति की वजह से ही न्यायालय में नियमित सुनवाई प्रारंभ हुई है।

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