राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पुनरुद्धार का काम जारी है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा- प्रदेश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहरें भावी पीढ़ियों को समृद्ध अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। हमारे गौरवशाली इतिहास, ज्ञान, कला और सभ्यता का जीवंत प्रतीक हैं।
अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व
धरोहरों का संरक्षण एवं संवर्धन समय की आवश्यकता है, जिससे भावी पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व का अनुभव कर सकें। प्रदेश में प्राचीन मंदिरों एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य निरंतर किया जा रहा है प्रदेश में बिखरे मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से मूल स्वरूप में पुनर्स्थापन किया जा रहा है।
वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्स्थापित
सीहोर जिले का देवबड़ला और रायसेन जिले का आशापुरी क्षेत्र पुरातात्विक पुनरुद्धार के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आया है। यहां मंदिरों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था, किंतु उत्खनन के दौरान प्राप्त बिखरे अवशेषों एवं खंडित प्रतिमाओं को वैज्ञानिक पद्धति से एकत्रित कर पुनर्स्थापित किया गया है।
मंदिर परिसरों का वैज्ञानिक संरक्षण
सीहोर जिले के देवबड़ला में 11वीं शताब्दी के परमारकालीन मंदिर अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण कराया गया है। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में सिद्धेश्वर एवं अन्य मंदिर परिसरों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जा रहा है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर में प्राचीन धरोहरों को संरक्षित किया गया है। रायसेन जिले के धवला क्षेत्र में मंदिरों की संरचनात्मक सुरक्षा एवं विशेष सफाई कार्य किए गए हैं।

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