जाम से राहत के लिए हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश, 15 दिन में प्रशासन से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट


रांची। हजारीबाग शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासन को यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए गंभीरता से ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने शहर के बीच स्थित बस स्टैंड को बाईपास के पास शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर भी विचार करने को कहा है।

बस स्टैंड शहर से बाहर करने पर विचार

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि हजारीबाग में बाईपास हाईवे बन चुका है। ऐसे में शहर के बीच बस स्टैंड होने से यातायात का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। बस स्टैंड को बाईपास के समीप स्थानांतरित करने से शहर के अंदर वाहनों का दबाव कम हो सकता है।

15 दिन में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने प्रशासन को बस स्टैंड स्थानांतरण की संभावनाओं पर उच्चस्तरीय बैठक करने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए सुझावों पर भी गंभीरता से विचार करने को कहा है।अदालत ने प्रशासन से अब तक की कार्रवाई और आगे की प्रस्तावित योजना की जानकारी देते हुए 15 दिनों के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है।

अतिक्रमण और ट्रैफिक सिग्नल को लेकर भी सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने बताया कि पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद शहर में ट्रैफिक सिग्नल लगाने और सड़क किनारे हुए अतिक्रमण हटाने को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। इसके चलते शहर के कई इलाकों में रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है।

पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप

याचिकाकर्ता ने हजारीबाग पुलिस प्रशासन पर कथित दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया। उन्होंने बताया कि कोर्रा थाना प्रभारी को संज्ञेय अपराध से संबंधित शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को पुलिस प्रशासन को स्पष्ट रूप से अवगत कराने का निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के साथ किसी तरह का उत्पीड़न या प्रताड़ना हुई तो अदालत इसे गंभीरता से लेगी।

अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हजारीबाग प्रशासन के सामने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाने की चुनौती है। बस स्टैंड को बाईपास के पास शिफ्ट करने का प्रस्ताव शहर के यातायात दबाव को कम करने की दिशा में अहम कदम हो सकता है। हालांकि, इसके लिए यात्रियों की सुविधा, परिवहन व्यवस्था और स्थानांतरण की व्यवहारिकता पर विस्तृत मंथन करना होगा।