सुशील खरे, रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना की मल्टी में बकायदारों के खिलाफ बुधवार को नगर निगम की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। बकाया राशि जमा नहीं करने वाले 208 फ्लैटधारकों को बेदखल करने के लिए सुबह से ही नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस का भारी अमला मौके पर पहुंच गया। कार्रवाई के विरोध में रहवासी सड़क पर उतर आए, कलेक्टर कार्यालय और नगर निगम के बाहर धरना दिया और बाद में महापौर से मुलाकात कर कार्रवाई रोकने की मांग की। पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर पहुंचे कांग्रेस नेता पारस सकलेचा और नगर निगम आयुक्त के बीच तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद सकलेचा की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।

सुबह से भारी पुलिस बल की तैनाती, फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई शुरु

4 अगस्त तक बकाया राशि जमा कराने की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के बाद बुधवार सुबह नगर निगम की टीम महिला पुलिस बल, जिला प्रशासन के अधिकारियों और बड़ी संख्या में पुलिस जवानों के साथ डोसीगांव मल्टी पहुंची। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

रहवासी ताले लगाकर निकले, रास्ते में रोके गए

कार्रवाई का विरोध करते हुए कई रहवासियों ने अपने फ्लैटों पर ताले लगाए और नए कलेक्टर से मिलने के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और कार्रवाई स्थगित करने की मांग करने लगे। बाद में रहवासी नगर निगम पहुंचे और महापौर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इस दौरान मल्टी परिसर में बेदखली की कार्रवाई जारी रही।

पूर्व महापौर पारस सकलेचा और आयुक्त में तीखी नोकझोंक

कार्रवाई की जानकारी मिलने पर कांग्रेस नेता पारस सकलेचा भी डोसीगांव पहुंचे। उन्होंने रहवासियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और बरसात के मौसम में गरीब परिवारों को बेघर किए जाने का विरोध किया। इसी दौरान उनकी नगर निगम आयुक्त से तीखी बहस हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच काफी देर तक गर्मागर्म नोकझोंक होती रही। इस दौरान सकलेचा ने आयुक्त की नौकरी तक खाने की बात कह दी। पूर्व महापौर कांग्रेस नेता पारस सकलेचा ने निगम का नोटिस भी फ़ाड़ कर फेंक दिया। 

जमीन पर बैठकर किया विरोध, तबीयत बिगड़ी

कार्रवाई के दौरान जब निगम अमला सामान हटाने लगा तो पारस सकलेचा जमीन पर बैठ गए और कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा, “मर जाऊंगा, लेकिन नहीं उठूंगा।” सकलेचा ने नगर निगम द्वारा रहवासियों का वाहन में रखा सामान भी बाहर निकालना शुरू कर दिया। पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने विरोध जारी रखा। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।

क्या है पूरा मामला?

नगर निगम ने 31 जुलाई को डोसीगांव मल्टी के 208 हितग्राहियों को नोटिस जारी कर 4 अगस्त तक 1.80 लाख रुपये जमा करने के निर्देश दिए थे। चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं होने पर फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी। समय-सीमा समाप्त होने के बाद बुधवार को बेदखली अभियान शुरू कर दिया गया।

रेलवे की जमीन से हुआ था पुनर्वास

जावरा रोड स्थित शिवशंकर कॉलोनी और प्रकाश नगर स्लम बस्ती, जो रेलवे की भूमि पर बसी थी, वहां से वर्ष 2020-21 में अतिक्रमण हटाने के बाद 396 पात्र हितग्राहियों का पुनर्वास डोसीगांव स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना में किया गया था। उस समय हितग्राहियों से 20 हजार रुपये मार्जिन मनी जमा कराई गई थी, शेष 1.80 लाख रुपये बैंक ऋण के माध्यम से जमा किए जाने थे।

208 लोगों ने न लोन लिया, न राशि जमा की

नगर निगम के अनुसार कुल 396 हितग्राहियों में से 166 ने बैंक से ऋण लिया, जबकि 20 लोगों ने एकमुश्त राशि जमा कर दी। वहीं 208 हितग्राहियों ने न तो ऋण लिया और न ही बकाया राशि जमा की। निगम का कहना है कि कई ऋण खातों के एनपीए होने से अन्य हितग्राहियों के ऋण भी प्रभावित हुए हैं।

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