मनेंद्र पटेल, दुर्ग। महापौर अलका बाघमार की मुश्किलें कम होने का नाम ले रही है। हर रोज महापौर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बनी हुई है। कभी ठेले वाले को थप्पड़ मारने का वीडियो तो कभी मंच से अधिकरियों को फटकार लगाते हुए वीडियो वायरल हो रहे हैं। वहीं शुक्रवार को मेयर अल्का बाघमार पर मंडी बोर्ड के एसडीओ, आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता और एसडीओ को अपने केबिन में रोककर धमकाने का आरोप अफसरों ने लगाया है।
दरअसल यह विवाद 14 मई 2026 को उरला हाईस्कूल में हुए एक भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ। यहां अतिरिक्त कक्ष और हॉल निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव समेत कई लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान महापौर ने मंच से अधिकारियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी काम नहीं कर सकते तो कार्यक्रम में आने की जरूरत नहीं है। मंत्री जी पैसा ला रहे हैं, लेकिन विकास कार्य रुक रहे हैं। वहीं अब अलका बाघमार ने शुक्रवार को निगम और मंडी बोर्ड के तीन अधिकारियों को अपने केबिन में बुलाकर जमकर फटकार लगाई।


जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर अफसरों को रोका
अधिकारियों में आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता जेके मेश्राम, एसडीओ सीके सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे शामिल थे। महापौर ने उनसे कार्य में हुई गड़बड़ी को लेकर जवाब मांगा। बताया जा रहा है कि जब जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। लगभग 3 घंटे तक यह चर्चा चलती रही। इसके बाद एक अधिकारी ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम नगर निगम पहुंची। पुलिस ने स्थिति संभाली और अधिकारियों को केबिन से बाहर निकाला।
किसी को बंधक नहीं बनाया गया था : महापौर
अधिकारियों ने केबिन में जबरदस्ती बिठाए रखने का आरोप लगाया। इसके बाद मामला और बढ़ गया। अब महापौर अलका बाघमार ने मामले में सफाई देते हुए कहा है कि किसी को बंधक नहीं बनाया गया था।
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