हिसार: जिले के मय्यड़ गांव में नियति का एक ऐसा क्रूर खेल सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अपने पिता की मौत के ठीक 7 दिन बाद, सीमा सुरक्षा बल (BSF) में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात 48 वर्षीय बेटे वेदपाल ने भी शनिवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। शनिवार दोपहर बाद जब राजकीय सम्मान के साथ वीर सपूत का अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और पूरा गांव रो पड़ा।
पिता को दवा दिलाने आए थे गांव, रास्ते में हुआ हादसा
गोरखपुर में तैनात सब-इंस्पेक्टर वेदपाल अपने 73 वर्षीय बीमार पिता आजाद सिंह को दवा दिलवाने के लिए 28 अगस्त को अपने पैतृक गांव मय्यड़ आए थे। 1 सितंबर को जब वे फरीदाबाद से लौट रहे थे, तभी सांपला के पास रोहद टोल पर अचानक गाड़ी के आगे गाय आ गई। गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें उनके पिता आजाद सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद बिगड़ी तबीयत
हादसे के बाद वेदपाल को प्राथमिक उपचार देकर सांपला सीएचसी से छुट्टी दे दी गई थी। परिजन 2 सितंबर को उन्हें हांसी के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने दवा देकर उन्हें घर भेज दिया। लेकिन घर आने के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। शुक्रवार सुबह जब उन्हें जिंदल अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उनके प्लेटलेट्स काफी कम बताए।
एक हफ्ते में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार
तबीयत अधिक बिगड़ने के कारण शनिवार तड़के करीब साढ़े 3 बजे वेदपाल ने भी दम तोड़ दिया। महज एक हफ्ते के भीतर पिता और बेटे दोनों की मौत से इस हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक वेदपाल अपने पीछे 70 वर्षीय बुजुर्ग मां सावित्री देवी, पत्नी, 11 साल का मासूम बेटा और एक दिव्यांग भाई छोड़ गए हैं।
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