हिसार नगर निगम ने शहरवासियों को बंदरों के बढ़ते हमलों और आतंक से निजात दिलाने के लिए एक साल का विशेष टेंडर जारी किया है। आगामी 15 जुलाई को खुलने वाले इस टेंडर के तहत प्रति बंदर पकड़ने और जंगल में सुरक्षित छोड़ने की दर 600 रुपये तय की गई है।
हिसार। शहर में बंदरों के बढ़ते खौफ और आतंक से आम जनता को राहत दिलाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर की विभिन्न रिहायशी कॉलोनियों जैसे सेक्टर-14, कमला नगर और हाउसिंग बोर्ड में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों ने अपने आंगनों को लोहे की जालियों से ढक दिया है। इस गंभीर समस्या के स्थाई समाधान के लिए हिसार नगर निगम ने एक वर्ष की अवधि के लिए बंदरों को पकड़ने का नया टेंडर आमंत्रित किया है जिसकी आखिरी तारीख 15 जुलाई तय की गई है। इस नई योजना के तहत ठेका लेने वाली प्राइवेट एजेंसी को प्रत्येक बंदर पकड़कर फिरोजपुर झिरका के अरावली जंगलों में सुरक्षित छोड़ने के बदले अधिकतम 600 रुपये प्रति बंदर की दर से भुगतान किया जाएगा।
पारदर्शिता के लिए होगी वीडियोग्राफी
नगर निगम प्रशासन ने इस पूरी पकड़-धकड़ की मुहिम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बेहद कड़े नियम और शर्तें लागू की हैं। टेंडर की मुख्य शर्तों के अनुसार संबंधित ठेकेदार को पकड़े गए सभी बंदरों को जंगल में सुरक्षित छोड़ते समय पूरी प्रक्रिया की बकायदा साफ वीडियोग्राफी करके उसकी एक सीडी नगर निगम के कार्यालय में सबूत के तौर पर जमा करानी होगी। इसके साथ ही भुगतान के फाइनल बिल के साथ बंदरों को पकड़ने और उन्हें परिवहन करने की तारीख सहित स्पष्ट फोटोग्राफ भी संलग्न करने होंगे। इस काम को शुरू करने के लिए इच्छुक फर्म को 50 हजार रुपये की धरोहर राशि और एक हजार रुपये की टेंडर फीस भी जमा करानी होगी।
पशु क्रूरता पर होगी कार्रवाई
निगम आयुक्त ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि बंदरों को पकड़ने की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके साथ किसी भी प्रकार की अमानवीय क्रूरता नहीं की जानी चाहिए। यदि कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती पाई गई तो उसके खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट 1994 के तहत बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। शहर के मेयर प्रवीण पोपली ने बताया कि कागजी औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं जिससे लोगों को बंदरों के डर से जल्द राहत मिलेगी। गौरतलब है कि साल 2016 में सेक्टर-14 में बंदरों को भगाने के प्रयास में करंट लगने से एक दादी और पोते की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है।

