काजल, हिसार. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद हरियाणा रोडवेज हिसार कार्यशाला में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सीएम फ्लाइंग टीम ने मंगलवार को दूसरी बार छापेमारी कर जांच की। दूसरी जांच के दौरान पहले निरीक्षण में मिले कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मौके से हटाए जाने के तथ्य सामने आए हैं। साथ ही विभागीय रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति में भी गंभीर अंतर पाया गया, जिसे जांच टीम ने गंभीर अनियमितता माना है।सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने मामले में कार्रवाई की।

इस मौके पर डीएसपी विक्रम भादू, वन विभाग के हिसार के डीएफओ रोहताश, फतेहाबाद के डीएफओ राजेश, एएसआई सुरेंद्र, हेड कांस्टेबल विजय भी मौजूद रहे।सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने बताया कि 26 जून को गुप्त सूचना के आधार पर सीएम फ्लाइंग ने रोडवेज कार्यशाला में पहली बार छापेमारी की थी। उस दौरान जांच में कार्यशाला परिसर में 86 पेड़ों के कटे हुए ठूंठ (जड़ें) तथा 132 पोल साइज पौधे उखाड़े हुए मिले थे। इसके अलावा कटे हुए पेड़ों की लकड़ी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था और लकड़ी को खुर्द-बुर्द किए जाने के तथ्य भी सामने आए थे। संबंधित कम्पनी द्वारा लकड़ी का मूल्य भी सरकारी खाते में जमा नहीं कराया गया था, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान होने की आशंका जताई गई थी।

वन विभाग ने उस समय स्पष्ट किया था कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार बिना सक्षम अनुमति किसी भी सरकारी अथवा निजी परिसर में पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रारंभिक जांच में मामला न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का प्रतीत हुआ था।

उन्होंने बताया कि पहली जांच के दौरान वन विभाग द्वारा जिन कटे हुए पेड़ों की जड़ों की मौके पर नंबरिंग की गई थी, दूसरी जांच में उनमें से लगभग 19 पेड़ों की जड़ें जमीन के अंदर से मौके से गायब मिलीं। परिसर के बाहर रखी गई कटे पेड़ों की जड़ों को भी हटा दिया गया था। वन विभाग के अनुसार सरकारी परिसर में से इस तरह जड़ों का गायब होने गम्भीर बात है। जबकि परिसर में चारदिवारी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पहली जांच के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जांच पूरी होने तक मौके से कोई भी जड़, लकड़ी अथवा अन्य साक्ष्य नहीं हटाए जाएंगे। इसके बावजूद साक्ष्यों को हटाया जाना प्रथम दृष्टया जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ का गंभीर मामला प्रतीत होता है। सरकारी परिसर जिसमें चार दिवारी बनी हुई है और उसमें से इस तरह से जड़ों का गायब होना एक गंभीर मामला है।

जांच के दौरान वन विभाग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां सामने आईं। एक पत्र में विभाग की ओर से 40 से 50 पेड़ काटे जाने का उल्लेख किया गया, जबकि मौके पर इससे कहीं अधिक संख्या में पेड़ कटे होने के साक्ष्य मिले।इसी प्रकार एक अन्य रिकॉर्ड में 128 पेड़ काटे जाने तथा दो पेड़ खड़े होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन दूसरी जांच के दौरान मौके पर कोई भी पेड़ खड़ा नहीं मिला। जांच टीम के अनुसार वे दोनों पेड़ भी बिना अनुमति हटाए जा चुके थे।

इसके अतिरिक्त विभागीय रिकॉर्ड में केवल 10 सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ काटे जाने का उल्लेख था, जबकि मौके पर 55 सफेदा पेड़ों की कटी हुई जड़ें पाई गईं। जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर माना है।सीएम फ्लाइंग टीम के अनुसार दूसरी जांच में सामने आए तथ्यों को पहली जांच के रिकॉर्ड के साथ मिलान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी ताकि संबंधित अधिकारियों, कम्पनी तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जा सके।सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने कहा कि बिना अनुमति सरकारी भूमि पर पेड़ों की कटाई करना तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करना अत्यंत गंभीर मामला है।

इसके बाद जांच के दौरान मिले साक्ष्यों को चारदिवारी में बने सरकारी परिसर से हटाना मामले को और अधिक गंभीर बना देता है।

उन्होंने कहा कि सीएम फ्लाइंग इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार अथवा अन्य व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर हरित क्षेत्र बढ़ाना है। उन्होंने सभी सरकारी विभागों, संस्थानों और आम नागरिकों से बिना अनुमति पेड़ों की कटाई न करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।