Automobile Desk – सफर के दौरान कार में केबल ढूंढना, उसे फोन से कनेक्ट करना और फिर उलझे हुए तारों को संभालना हमेशा से ही एक झंझट भरा काम रहा है। लेकिन आजकल की आधुनिक गाड़ियों में मिलने वाले ‘वायरलेस चार्जिंग’ फीचर ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। कार के डैशबोर्ड या गियर कंसोल के पास बने पैड पर फोन रखते ही चार्जिंग शुरू हो जाती है। पहली नजर में यह किसी जादू जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म का एक बेहद सटीक वैज्ञानिक नियम काम करता है।

किस टेक्नोलॉजी पर काम करती है यह चार्जिंग?

कार में मिलने वाला वायरलेस चार्जर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर काम करता है। आसान शब्दों में कहें तो यह बिना किसी भौतिक तार के एक जगह से दूसरी जगह बिजली भेजने का जरिया है। गाड़ियों और स्मार्टफोन में आमतौर पर ‘Qi’ (ची) ग्लोबल स्टैंडर्ड तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए दो मुख्य चीजों की जरूरत होती है—पहली ‘ट्रांसमीटर कॉइल’, जो कार के चार्जिंग पैड में छुपी होती है और दूसरी ‘रिसीवर कॉइल’, जो आपके स्मार्टफोन के पिछले हिस्से में यानी बैक पैनल के अंदर लगी होती है। ये दोनों कॉइल तांबे (Copper) के पतले तारों से बनी होती हैं।

बिना तार फोन तक कैसे पहुंचती है बिजली?

जब कार स्टार्ट होती है और आप चार्जिंग पैड को ऑन करते हैं, तो गाड़ी की बैटरी से मिलने वाला करंट कार के चार्जिंग पैड में मौजूद तांबे की कॉइल में बहने लगता है।

मैग्नेटिक फील्ड का बनना: कॉइल में जैसे ही अल्टरनेटिंग करंट (AC) प्रवाहित होता है, वह अपने चारों ओर एक अदृश्य और तेजी से बदलने वाला चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) तैयार कर लेता है.

ऊर्जा का ट्रांसफर: जब आप अपना फोन इस पैड के ऊपर रखते हैं, तो फोन के अंदर मौजूद तांबे की कॉइल इस चुंबकीय क्षेत्र के संपर्क में आती है।

करंट में बदलाव: चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव से फोन की कॉइल में एक छोटा इलेक्ट्रिक करंट उत्पन्न होने लगता है।

बैटरी चार्ज होना: फोन के भीतर लगा पावर मैनेजमेंट सर्किट इस मिले हुए करंट को डायरेक्ट करंट (DC) में बदल देता है और यही ऊर्जा फोन की बैटरी में जमा होने लगती है।

अलाइनमेंट और गर्मी का ध्यान रखना क्यों जरूरी?

वायरलेस चार्जिंग का पूरा फायदा उठाने के लिए फोन का पैड पर सही तरीके से रखा होना बेहद जरूरी है। कार का चार्जर और फोन की कॉइल जब एक-दूसरे के ठीक आमने-सामने होती हैं, तभी बिजली का ट्रांसफर सबसे बेहतर ढंग से होता है। अगर फोन थोड़ा भी खिसक जाए या तिरछा रखा हो, तो ऊर्जा फोन की बैटरी तक पहुँचने के बजाय गर्मी (Heat) के रूप में बर्बाद होने लगती है। यही वजह है कि कार निर्माता कंपनियां पैड पर एक खास ग्रिप या रबड़ की सतह देती हैं ताकि गाड़ी के हिलने पर भी फोन अपनी जगह से न हटे।

यह तकनीक पूरी तरह सुरक्षित होती है क्योंकि मॉडर्न कारों में ओवरहीटिंग और फॉरेन ऑब्जेक्ट डिटेक्शन (FOD) जैसे फीचर्स होते हैं। अगर पैड पर फोन के बजाय कोई चाबी या सिक्का छूट जाए, तो चार्जर अपने आप बंद हो जाता है ताकि कोई हादसा न हो।