Tej Pratap Yadav: बिहार बंद हिंसा मामले में न्यायिक हिरासत के बाद बेऊर जेल भेजे गए लालू यादव के बड़े बेटे और जजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की पहली रात सामान्य कैदी की तरह नहीं बीती। स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर दिनभर जेल प्रशासन की गतिविधियां तेज रहीं। इस दौरान तेज प्रताप ने घर का भोजन, एसी वाला कमरा समेत कुछ अन्य सुविधाओं की मांगी की, जिसे देने से जेल प्रशासन ने साफ इंकार कर दिया। जेल प्रशासन ने कहा कि, बिना कोर्ट के आदेश किसी कैदी को जेल मैनुअल से बाहर की कोई भी चीज या कोई रियायत नहीं दी जा सकती।

सेंट्रल मॉल से हुई थी गिरफ्तारी

गौरतलब है कि बिहार बंद के दौरान छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए शनिवार को वह डाक बंगले चौराहे पर पहुंचे थे, जहां से कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें डिटेन करने के बाद वापस उन्हें उनके आवास पर छोड़ दिया। इसके बाद शाम को तेज प्रताप यादव पटना सेंट्रल मॉल में घूमने के लिए निकले थे, जहां से पुलिस ने उन्हें जांच में सहयोग करने के नाम पर हिरासत में ले लिया।

इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में बेउर जले भेज दिया गया। बेउर जेल में उन्हें शिफ्ट करने से पहले वारंट में दर्ज हृदय संबंधी बीमारी को देखते हुए सबसे पहले उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। जेल अस्पताल में ईसीजी, ब्लड प्रेशर, शुगर समेत जरूरी जांच की गई। रिपोर्ट सामान्य मिलने के बाद रविवार सुबह उन्हें डिवीजन वार्ड में भेजा गया।

पहले मना किया, फिर खाया दाल, चावल और सब्जी

डिवीजन वार्ड में रहने के बावजूद उनकी व्यवस्था पूरी तरह जेल नियमों के मुताबिक ही रखी गई। वार्ड के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई और एहतियात के तौर पर अन्य बंदियों की आवाजाही सीमित कर दी गई। किसी भी कैदी को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की समीक्षा करते रहे। रविवार को तेज प्रताप ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए घर से भोजन मंगाने की इच्छा जताई।

जेल प्रशासन ने उन्हें बताया कि अदालत की अनुमति के बिना इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। शुरुआत में उन्होंने जेल का खाना लेने से मना किया, लेकिन बाद में अधिकारियों के समझाने पर दाल, चावल और सब्जी का भोजन कर लिया। इसके अलावा उन्होंने बेहतर बिस्तर और ठंडी जगह पर रखने की मांग भी रखी, जिसे नियमों का हवाला देकर स्वीकार नहीं किया गया।

तेज प्रताप के खिलाफ लगी हैं कई गंभीर धाराएं

चुकी अब बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन से जुड़े सभी मामलों में बंद किए गए छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का ऐलान किया है, ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी की क्या इस मामले में तेज प्रताप यादव को राहत मिल पाती है की नहीं? बता दें कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ बीएनएस की धारा 132 के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही ऑन-ड्यूटी पुलिस ऑफिसर पर हमला करने को लेकर धारा 297 भी लगाई गई है। तेज प्रताप के खिलाफ सबसे गंभीर धारा बीएनएस की 109 है, जो कि सीधे तौर पर हत्या के प्रयास के लिए लगाई जाती है।

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