Dharm Desk – जीवन में अचानक परेशानियां बढ़ने लगें। काम बनते-बनते रुक जाएं। आर्थिक नुकसान होने लगे या परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और विवाद बढ़ जाएं तो इनसान मानसिक रूप से भी परेशान हो जाता है। ज्योतिष में ऐसी परिस्थितियों को कई बार शनि के प्रतिकूल प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है। शनिदेव को कर्म फलदाता कहा गया है और धार्मिक मान्यता है, वे इंसान को उसके कर्मों के अनुरूप फल प्रदान करते हैं।

शनिदेव के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए शनिवार के दिन पूजा-पाठ और दान सहित कई उपाय बताए गए हैं। आम तौर पर लोग शनिवार केदिन शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें नियमित रूप से कर देने से शनि संबंधी परेशानियों दूर होना शुरू हो जाती है।
- हनुमान चालीसा का करें पाठ
शनि के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए रोज हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू करें। इसके साथ ही मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने शुभ फल देने वाला होगा। हनुमानजी की उपासना करने से शनि देव की पीड़ा शांत होती है। - यह उपाय शनिवार और मंगलवार को करें
शनिवार और मंगलवार को हनुमानजी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। संभव हो तो इन दोनों दिनों में हनुमान मंदिर जकर दर्शन और पूजा भी करनी चाहिए। श्रद्धा के साथ की गई हनुमान उपासना को शनि संबंधी बाधाओं से राहत देने वाला माना जाता है। - शनिदेव को चढ़ाएं सरसों का तेल और काले तिल
शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करते समय सरसों के तेल और काले तिल का प्रयोग किया जाता है। शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित कर उनका अभिषेक करने की धार्मिक परंपरा है। साथ ही शनिवार का व्रत रखने और नियमित रूप से शनिदेव के दर्शन करने को भी शुभ माना है।
विशेष सावधानी इन चीजों को लेकर रखें
ज्योतिषीय उपायों के अनुसार शनि से संबंधित वस्तुओं का दान स्वीकार करने से बचना चाहिए। इसके अलावा रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा में 4, 5, 6 और 7 मुखी रुद्राक्ष का उल्लेख मिलता है। हालांकि, रुद्राक्ष धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह लेना उचित होता है। वहीं शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल से बना छल्ला मध्यमा उंगली में धारण करने का उपाय कारगर बताया बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य शनिदेव को प्रसन्न करना और जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करना है।



