Dharm Desk – वर्तमान समय में कई घरों में यह एक आम लेकिन अत्यंत गंभीर परेशानी बन चुकी है कि बच्चे अपने माता-पिता की बात सुनना या मानना बिल्कुल बंद कर देते हैं। बच्चे हर छोटी-छोटी बात पर बदतमीजी करने लगते हैं। माता-पिता के उचित निर्देशों को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हैं और उनके समझाने का उन पर कोई भी सकारात्मक असर नहीं पड़ता है।

इस प्रकार के विद्रोही व्यवहार से न केवल घर का वाता वरण अत्यधिक तनाव पूर्ण हो जाता है बल्कि बात-बात पर होने वाले झगड़ों से माता-पिता मानसिक रूप से बहुत परेशान हताश और निराश हो जाते हैं। बच्चों के इस जिद्दी और आक्रामक व्यवहार के कारण माता पिता का मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा भी धीरे-धीरे कम होने लगती है। जिससे उन्हें समाज और रिश्तेदारों के बीच कई बार गरी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

समस्या के समाधान के लिए करे ये काम

  1. पीली सरसों
    भारतीय पारंपरिक और आध्यात्मिक मान्यताओं में पीली सरसों को नकारात्मक ऊर्जा को तुरंत दूर करने और घर में सकारात्मकता का तेज संचार करने के लिए बहुत शक्तिशाली माना जाता है। यह घर के झगड़े और अकारण होने वाले मानसिक तनाव को जड़ से खत्म करने में सहायक होती है।
  2. सूखी लाल मिर्च
    साबुत सूखी लाल मिर्च का प्रयोग सदियों से बुरी नजर उतारने और मनुष्य के आस-पास मौजूद किसी भी प्रकार के नकारात्मक आभामंडल को नष्ट करने के लिए किया जाता रहा है।

उपाय करने की सरल और प्रभावी विधि

  • उपाय को करने के लिए सबसे पहले अपनी हथेली में एक मुट्ठी या थोड़ी सी पीली सरसों लें और उसके ऊपर तीन या पांच साबुत सूखी लाल मिर्च रख लें।
  • जिस बच्चे का स्वभाव बहुत अधिक चिड़चिड़ा, गुस्सैल या जिद्दी हो गया है, उसे सामने बिठाकर उसके सिर के ऊपर से इस सामग्री को घड़ी की दिशा में सात बार घुमाएं।
  • बच्चे के ऊपर से सात बार उतारने के बाद बिना किसी से कुछ बोले इस सामग्री को घर के बाहर ले जाकर या किसी सुरक्षित स्थान पर आग में तुरंत जला दें।
  • ऐसी मान्यता है कि जैसे-जैसे लाल मिर्च और पीली सरसों आग में जलकर राख होती है, वैसे-वैसे बच्चे के ऊपर से बुरी नजर, हर प्रकार की नकारात्मकता और जिद्दीपन का परभाव भी जलकर हमेशा के लिए भस्म हो जाता है और उसके व्यवहार में सौम्यता आने लगती है।
  • पीली सरसों और लाल मिर्च का संयुक्त रूप से उपयोग करने से यह माना जाता है कि बच्चे के मन-मस्तिष्क पर हावी हो रही नकारात्मकता बहुत ज्यादा क्रोध और चिड़चिड़ापन तुरंत शांत होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा और बच्चों के व्यवहार का गहरा संबंध होता हैं।कई बार बच्चों का अचानक से बागी हो जाना या माता-पिता की बात न मानना केवल उनकी उम्र का पड़ाव या मनोवैज्ञानिक बदलाव नहीं होता बल्कि उनके आस-पास मौजूद किसी अदृश्य नकारात्मक ऊर्जा या तीव्र नजर दोष का परिणाम भी हो सकता है।
  • जब बच्चे बाहरी दुनिया स्कूल या दोस्तों के संपर्क में अधिक आते हैं तो उन पर कई तरह की बाहरी ऊर्जाओं का प्रभाव पड़ता है जो उनके कोमल मन को भ्रमित कर उन्हें क्रोधी बना देता है। ऐसी स्थिति में बच्चों पर केवल डांट-फटकार या सख्ती काम नहीं आती, बल्कि इन सदियों पुराने पारंपरिक उपायों के माध्यम से उनके मानसिक आभामंडल को शुद्ध करने की सख्त आवश्यकता होती है।