संजीव शर्मा, कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में वन संरक्षण को लेकर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। वन विभाग, राजस्व और पुलिस अमले की संयुक्त टीम ने मुलमला रेंज के मालगांव, धुंसी और बुडरा क्षेत्र में करीब 35 हेक्टेयर (लगभग 100 एकड़) वनभूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। वर्षों से घने जंगलों को काटकर यहां खेती की जा रही थी और जंगल के भीतर मकान भी बना लिए गए थे। कार्रवाई के दौरान अवैध निर्माणों को हटाकर जमीन को वन विभाग के कब्जे में लिया गया।
जानकारी के अनुसार बजरंग नेताम (पिता मानसिंह), निवासी ग्राम कुम्हारी तथा चैतन्य कश्यप निवासी बड़े कनेरा पर वनभूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण करने का आरोप है। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों परिवार वर्ष 2010 से लगातार वनभूमि पर कब्जा बढ़ाते जा रहे थे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में बहुमूल्य वृक्षों की कटाई कर घने जंगल को खुले मैदान में तब्दील कर दिया गया।


पेड़ों को सुखाने के लिए लगाई आग, डाले केमिकल
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमणकारियों द्वारा केवल पेड़ काटे ही नहीं गए, बल्कि आसपास के खड़े वृक्षों को भी नुकसान पहुंचाया गया। पेड़ों के तनों में गार्डलिंग कर उन्हें सुखाने का प्रयास किया गया, कई स्थानों पर आग लगाई गई और रसायनों का उपयोग कर जंगल को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा था। इसके बाद कब्जा की गई जमीन पर खेती शुरू कर दी गई थी।
कई बार दिए नोटिस नहीं माना तो हुई कार्रवाई
वन विभाग ने बताया कि संबंधित लोगों को अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए थे। बावजूद इसके कब्जा लगातार बढ़ता गया। इसके बाद दोनों परिवारों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई। रेंज अधिकारी द्वारा अन्य अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए डीएफओ को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसके बाद संयुक्त अभियान चलाया गया।
अब होगा वृक्षारोपण, फिर बसाया जाएगा जंगल
वन विभाग का कहना है कि कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर जल्द ही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य नष्ट हुए वन क्षेत्र को फिर से विकसित कर हरित आवरण बढ़ाना है।
ग्रामीण बोले – बहुत हुआ पट्टों का खेल, अब जंगल बचाना जरूरी
कार्रवाई के बाद क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने संतोष जताया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल ही उनकी आजीविका का आधार है। इन्हीं वनों से उन्हें रोजगार, लघु वनोपज और पर्यावरणीय सुरक्षा मिलती है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि वनभूमि पर अवैध कब्जे और पेड़ों की कटाई रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
संदेश साफ : पट्टे के नाम पर जंगल नहीं कटेंगे
वन विभाग की इस बड़ी कार्रवाई को पूरे जिले के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वनभूमि पर अवैध कब्जा, पेड़ों की कटाई और जंगलों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिले में अन्य अतिक्रमणकारियों की पहचान कर बेदखली की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है।
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