अमित पांडेय, खैरागढ़। जिले की शराब दुकानों में ओवर रेटिंग, अव्यवस्था और कानून व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच आखिरकार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। गंडई स्थित कंपोजिट शराब दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री का मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने संबंधित क्षेत्र के आबकारी उप निरीक्षक प्रभाकर सिरमौर को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब शराब दुकानों में अनियमितताओं को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम लगातार खबरें प्रकाशित करता रहा है।

शराब दुकानों में ओवररेटिंग, अव्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोरी को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद अब यह कार्रवाई पूरे मामले में बड़े प्रशासनिक असर के रूप में देखी जा रही है। दरअसल, 15 मई 2026 को जिला आबकारी विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया था कि ओवररेटिंग रोकने के लिए शराब दुकानों में अतिरिक्त आरक्षकों की तैनाती की गई है। उड़नदस्ता टीम को मजबूत किया गया है तथा औचक निरीक्षण की विशेष व्यवस्था की गई है। विभाग ने यह भी कहा था कि शराब दुकानों की निगरानी पहले से अधिक सख्ती से की जा रही है, लेकिन विभागीय दावों के महज कुछ सप्ताह बाद ही राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच में गंडई शराब दुकान में ओवररेटिंग पकड़ी गई।

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जांच में ज्यादा दाम पर शराब बेचने की हुई थी पुष्टि

जांच के दौरान तीन पाव देशी शराब, जिसकी निर्धारित कीमत 240 रुपये थी, उसे 250 रुपये में बेचा जाना पाया गया। मामले में विक्रेता के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया और निगरानी में लापरवाही मानते हुए संबंधित आबकारी उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया। जिले में शराब दुकानों को लेकर शिकायतें केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं हैं। कई दुकानों के आसपास आए दिन मारपीट, चाकूबाजी, शराबियों के हंगामे और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।

शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर

अब जब राज्य स्तरीय जांच के बाद सीधे जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई है तो यह साफ संकेत है कि शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था को लेकर शासन गंभीर है। हालांकि बड़ा सवाल अब भी बरकरार है कि जब निगरानी बढ़ाने के दावे किए जा रहे थे, तब ओवररेटिंग जैसी शिकायतें आखिर कैसे जारी रहीं? गंडई की यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लगातार उठाए गए सवालों की पुष्टि भी है, जिन्हें लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से सामने रखा था। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिले की अन्य शराब दुकानों में भी इसी तरह की सख्त जांच और जवाबदेही तय होती है या नहीं।

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