तमिलनाडु का इतिहास इस बात का गवाह है कि सिनेमा और राजनीति एक ही सिक्के के दो पहलू रहे हैं. 1970 के दशक में एमजी रामचंद्रन (MGR) ने अपनी फिल्मों के जरिए एक ऐसी इमेज बनाई थी जो आज अभिनेता विजय ने बनायी है. MGR ने अपना पहला चुनाव में 33.5 प्रतिशत और टीवीके ने 35% वोट शेयर हासिल किया क्योंकि राज्य में न सिर्फ बड़ा बदलाव देखने को मिला है, बल्कि आश्चर्यजनक तरीके से पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने मैदान मार लिया है.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी थलपति विजय की पार्टी तमिलिगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने 35% वोट शेयर के साथ लगभग 1.7 करोड़ वोट हासिल कर एमजी रामचंद्रन के 1977 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है.

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से तमिलनाडु के नतीजों ने अपनी ओर सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. अभिनेता विजय की पार्टी तमिलिगा वेट्री कझगम ने ने 35% वोट शेयर के साथ लगभग 1.7 करोड़ वोट हासिल किए हैं. टीवीके और थलपति विजय की इस बड़ी जीत ने एक बार फिर तमिलनाडु को एमजीआर के दौर की याद दिला दी है. क्योंकि जब पूर्व तमिलनाडु सीएम एमजी रामचंद्रन ने 1977 में अपना पहला चुनाव लड़ा था. तब उस दौर में उन्होंने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 33.5 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था.  

सबसे खास बात यह है कि विजय ने बिना किसी गठबंधन के अकेले दम पर एमजीआर के इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है. यही वजह है कि उनका यह प्रदर्शन अभूतपूर्व माना जा रहा है और तमिलनाडु की राजनीति में नए दौर की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.
 
वहीं सोमवार को आए नतीजे पर नजर डालें तो DMK को 24% वोट (करीब 1.1 करोड़) और AIADMK को 21% वोट (करीब 1 करोड़) मिले हैं.  अन्य पार्टियों में कांग्रेस को 3% (करीब 16 लाख), भाजपा को 3% (करीब 14 लाख) और NTK को 4% (करीब 19 लाख) वोट मिले. वहीं DMDK को 1.2% वोट (करीब 5.8 लाख) हासिल हुए. 

विजय की जीत महज उनकी फिल्मी लोकप्रियता का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीति और जमीनी जुड़ाव था. विजय ने सीधे तौर पर ‘जेन-जी’ और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को टारगेट किया, उनके भाषणों में रोजगार, आधुनिक शिक्षा और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की बात थी.

विजय की ऐसी आंधी चली है कि सत्ताधारी डीएमके का मजबूत संगठन भी उसके सामने धाराशायी हो गया. सिनेमा के ‘थलपति’ अब तमिलनाडु की सियासत के नए ‘सुपरस्टार’ बनकर उभरे हैं. तमिलनाडु की राजनीति पिछले पांच दशकों से मुख्य रूप से दो ध्रुवों DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है.

आपको बताते चले कि दक्षिण भारत की राजनीति में हमेशा से फिल्मी सितारों का दबदबा रहा है. MGR, करुणानिधि, जयललिता और एनटी रामाराव- ये सभी मेगास्टार थे जिन्होंने पर्दे से निकलकर राजनीति में अपनी जगह बनाई. जब ‘थलापति’ विजय ने राजनीति में कदम रखा, तो लगा कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है.

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