Business Desk – Income Tax Scrutiny Notice : अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया है, तो यह मानकर न चलें कि आपकी प्रक्रिया पूरी हो गई है. आयकर विभाग कुछ रिटर्न्स को जांच के लिए चुन सकता है और इसके लिए 30 जून एक अहम तारीख मानी जा रही है. विभाग धारा 143(2) के तहत स्क्रूटनी नोटिस जारी कर सकता है.

क्या होता है स्क्रूटनी नोटिस?

स्क्रूटनी नोटिस का मतलब यह नहीं है कि आपने कोई टैक्स चोरी की है. आयकर विभाग केवल आपके द्वारा दी गई जानकारी का सत्यापन करना चाहता है. यदि आपके ITR में दर्ज आय, कटौतियों या निवेश की जानकारी Form 26AS, AIS, TIS या बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो नोटिस जारी किया जा सकता है.

किन मामलों में आ सकता है नोटिस?

आय और टैक्स रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर
बड़े या असामान्य वित्तीय लेनदेन होने पर
सर्च या सर्वे से जुड़े मामलों में
पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) वाले मामलों में
निवेश या कटौतियों के दावों की जांच के लिए

नोटिस मिलने पर क्या करें?

यदि आपको नोटिस मिलता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें. इसके बाद Worklist और e-Proceedings सेक्शन में जाकर नोटिस देखें. मांगी गई जानकारी और दस्तावेज समय पर अपलोड करें. यदि किसी बिंदु से असहमति है तो उसका उचित कारण भी दर्ज कर सकते हैं.

जवाब नहीं दिया तो क्या होगा?

नोटिस की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है. इससे अतिरिक्त टैक्स डिमांड, ब्याज, जुर्माना या रिफंड में देरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. इसलिए निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देना जरूरी है.

कौन-कौन से दस्तावेज रखने होंगे तैयार?

स्क्रूटनी के दौरान आयकर विभाग आपसे बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, निवेश के दस्तावेज, टैक्स कटौती प्रमाणपत्र (TDS Certificate) और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मांग सकता है. इसलिए सभी दस्तावेज पहले से व्यवस्थित रखना बेहतर रहेगा.