राज्यसभा में प्रस्तुत UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार देशभर के 1,00,843 सरकारी स्कूलों का संचालन केवल एक शिक्षक के भरोसे हो रहा है। इसमें हरियाणा के 1,283 स्कूल शामिल हैं, जबकि सबसे अधिक 16,357 एकल शिक्षक वाले स्कूल आंध्र प्रदेश में हैं।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत एक बार फिर सरकारी आंकड़ों से सामने आ गई है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में UDISE+ 2025-26 के तहत उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार देशभर में 1,00,843 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां पूरे स्कूल का संचालन केवल एक शिक्षक के भरोसे हो रहा है। यही शिक्षक पहली से पांचवीं तक की सभी कक्षाओं को पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य, मिड-डे मील का रिकॉर्ड और अन्य सरकारी जिम्मेदारियां भी निभा रहा है।

राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी। आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक 16,357 एकल शिक्षक वाले स्कूल आंध्र प्रदेश में हैं। इसके बाद झारखंड में 9,827, महाराष्ट्र में 9,269, कर्नाटक में 8,042, उत्तर प्रदेश में 7,874 और राजस्थान में 7,200 ऐसे स्कूल हैं।

हरियाणा की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य में 1,283 सरकारी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एक ही शिक्षक पर पूरे स्कूल का बोझ होगा तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी।

विडंबना यह भी है कि एक ओर लाखों योग्य युवा शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर देशभर के हजारों स्कूल पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक शिक्षा की मजबूत नींव के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।

हरियाणा सरकार प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल होने का दावा करती है, लेकिन शिक्षा जैसी बुनियादी व्यवस्था में एक हजार से अधिक स्कूलों का केवल एक शिक्षक के भरोसे चलना गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है तो सबसे पहले स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करनी होगी, ताकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का समान अवसर मिल सके।