Formula 1 Grand Prix in India: रफ्तार के शौकीनों के लिए बड़ी खबर है। भारत में एक बार फिर Formula 1 रेस की वापसी की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने देश में Formula 1 और मोटरस्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और इसके पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इस पहल का एक अहम मकसद 2028 में भारत में Formula 1 Grand Prix आयोजित किए जाने की संभावनाओं का आकलन करना है।

जानकारी के मुताबिक, Task Force में करीब 10 सदस्य होंगे और इसकी अगुवाई नीति आयोग के युगल किशोर जोशी करेंगे। टीम में खेल, वाणिज्य, पर्यटन और राजस्व से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ मोटरस्पोर्ट्स क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधि भी इसका हिस्सा होंगे। इसके अलावा बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट, मद्रास इंटरनेशनल सर्किट और Federation of Motor Sports Clubs of India (FMSCI) के प्रतिनिधियों को भी Task Force में जगह दी गई है।

2028 में Formula 1 की वापसी की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, 2028 में भारत में Formula 1 Grand Prix की वापसी की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। हालांकि अभी रेस की वापसी को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। Task Force यह अध्ययन करेगी कि भारत में Formula 1 को दोबारा लाने के लिए किन बदलावों और व्यवस्थाओं की जरूरत होगी और क्या 2028 में Grand Prix आयोजित करना व्यावहारिक होगा।

Task Force भारत में मौजूदा मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही रेस के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं का भी आकलन किया जाएगा। सरकार और निजी कंपनियों के बीच Public-Private Partnership (PPP) मॉडल की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।

टैक्स विवाद सबसे बड़ी चुनौती

Formula 1 की भारत में वापसी के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती टैक्स और नीतिगत अड़चनें हो सकती हैं। Task Force का एक प्रमुख उद्देश्य इन्हीं समस्याओं का समाधान तलाशना है।

पिछली बार भारत में Formula 1 रेस के आयोजन के दौरान टैक्स को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। इसके अलावा लाइसेंस फीस, कस्टम ड्यूटी और सरकारी समर्थन की कमी जैसी चुनौतियों ने आयोजन की लागत और आयोजकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया था।

अब सरकार इस पूरे अनुभव को ध्यान में रखते हुए ऐसा नीतिगत रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिए बेहतर माहौल तैयार हो सके। Task Force मोटरस्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों की सिफारिश भी कर सकती है।

2011 में पहली बार भारत पहुंची थी Formula 1

भारत में Formula 1 का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन यहां आयोजित हुई रेस ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई थी। ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में पहली बार 2011 में Formula 1 Indian Grand Prix का आयोजन हुआ था।

भारत में 2011, 2012 और 2013 में कुल तीन Formula 1 रेस आयोजित की गईं और तीनों में Red Bull के ड्राइवर Sebastian Vettel विजेता रहे।

भारत में आखिरी Formula 1 Grand Prix 27 अक्टूबर 2013 को बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में आयोजित हुई थी। इसके बाद भारत से Formula 1 का सफर रुक गया।

क्यों बंद हो गई थी भारत में Formula 1 रेस?

भारत में Formula 1 के आयोजन को रोकने की सबसे बड़ी वजहों में टैक्स विवाद शामिल था। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार ने Formula 1 को खेल के बजाय मनोरंजन की श्रेणी में माना था। इसके चलते आयोजकों पर भारी Entertainment Tax लगाया गया।

इसके अलावा ऊंची लाइसेंस फीस, कस्टम ड्यूटी और सरकारी समर्थन से जुड़ी समस्याओं ने भी आयोजन को आर्थिक रूप से मुश्किल बना दिया। इन तमाम वजहों के चलते भारत में Formula 1 की रेस आगे जारी नहीं रह सकी।

Formula 1 से भारत को क्या फायदा?

सरकार की नई पहल सिर्फ एक रेस आयोजित करने तक सीमित नहीं है। Task Force यह भी आकलन करेगी कि Formula 1 और व्यापक मोटरस्पोर्ट्स को बढ़ावा देने से भारत को पर्यटन, निवेश और अर्थव्यवस्था के स्तर पर कितना फायदा हो सकता है।

एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की Formula 1 रेस से देश में विदेशी पर्यटकों के आने, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को फायदा मिलने, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने और नए निवेश के अवसर पैदा होने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करीब 15 साल के अंतराल के बाद भारत में एक बार फिर दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली कारें रेस ट्रैक पर दौड़ती नजर आएंगी? फिलहाल 2028 की संभावित वापसी की राह में कई चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार के Task Force के गठन से Formula 1 को भारत में दोबारा लाने की कोशिश ने जरूर नई उम्मीद जगा दी है।

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