अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति और संस्थागत ढांचे की व्यापक समीक्षा के लिए पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन, भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री राज चेट्टी और माइक्रोसॉफ्ट की वरिष्ठ अधिकारी आशा शर्मा को विभिन्न टास्क फोर्स में शामिल किया है। यह पहल कई वर्षों तक लक्ष्य से ऊपर रही महंगाई के बाद फेड की नीति-निर्माण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
केविन वॉर्श ने बनाई पांच टास्क फोर्स
फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने पांच विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। इनमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर मर्विन किंग, नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस सार्जेंट, वॉलमार्ट के पूर्व CEO डग मैकमिलन और सिलिकॉन वैली के निवेशक मार्क आंद्रेसेन जैसी वैश्विक हस्तियां भी शामिल हैं।
वॉर्श ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को जोड़ने का उद्देश्य फेड में नए विचारों को शामिल करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बदलती आर्थिक चुनौतियों के अनुरूप नीति-निर्माण को मजबूत बनाना है।
रघुराम राजन की क्या होगी भूमिका?
रघुराम राजन बैलेंस शीट पॉलिसी टास्क फोर्स में हार्वर्ड की अर्थशास्त्री करेन डायनन और फेड के पूर्व गवर्नर जेरेमी स्टीन के साथ काम करेंगे। यह पैनल फेड की बैलेंस शीट, एसेट होल्डिंग्स और मौद्रिक नीति पर उनके प्रभाव का लागत-लाभ विश्लेषण करेगा।
राज चेट्टी और आशा शर्मा को मिली अहम जिम्मेदारी
हार्वर्ड के अर्थशास्त्री राज चेट्टी डेटा टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। उनका समूह आर्थिक संकेतकों की गुणवत्ता और रियल-टाइम उपलब्धता बेहतर बनाने पर काम करेगा, ताकि नीतिगत फैसले अधिक सटीक हो सकें।
वहीं माइक्रोसॉफ्ट की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट आशा शर्मा प्रोडक्टिविटी और रोजगार टास्क फोर्स में शामिल होंगी। यह टीम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों के रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक विकास पर प्रभाव का अध्ययन करेगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह समीक्षा?
कोरोना महामारी के दौरान फेडरल रिजर्व ने अपनी बैलेंस शीट को करीब 9 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ाया था। अब बैलेंस शीट को सामान्य स्तर पर लाने और लगातार ऊंची महंगाई के अनुभव के बाद फेड अपने मौद्रिक नीति ढांचे, कम्युनिकेशन, डेटा, उत्पादकता, रोजगार और महंगाई संबंधी फ्रेमवर्क की व्यापक समीक्षा कर रहा है। ऐसे में भारतीय मूल के तीन विशेषज्ञों की नियुक्ति वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है.
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