भारत ने BRICS देशों के बीच व्यापार को और आसान बनाने की पहल की है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए. इसके साथ ही व्यापार में आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना और पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना जरूरी है.

नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 में बोलते हुए गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन ऐसी होनी चाहिए जो दोनों दिशाओं में काम करे और किसी भी देश के लिए व्यापार विकास में रुकावट न बने. गोयल ने BRICS देशों से अपील की कि वे एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजारों को ज्यादा खुला बनाएं. इसमें कच्चा माल और जरूरी खनिज यानी क्रिटिकल मिनरल्स भी शामिल हैं. उन्होंने नियमों को आसान बनाने और कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत बताई.

टैरिफ से ज्यादा बड़ी समस्या गैर-टैरिफ बाधाएं

गोयल ने कहा कि व्यापार में सिर्फ आयात शुल्क यानी टैरिफ ही चुनौती नहीं है. कई बार गैर-टैरिफ बाधाएं यानी जटिल नियम, मंजूरी और दूसरी प्रक्रियाएं कारोबार की लागत को काफी बढ़ा देती हैं. उन्होंने BRICS देशों के बीच ऐसे नियमों और प्रक्रियाओं को कम करने की अपील की, ताकि कंपनियों के लिए दूसरे देशों में सामान बेचना आसान हो सके.

भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसके जरिए वह सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है. गोयल के मुताबिक, BRICS देश दुनिया के करीब एक चौथाई व्यापार का हिस्सा हैं. ये देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और करीब 40% वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं.

BRICS में UPI और लोकल करेंसी का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर

गोयल ने सीमा पार कारोबार में डिजिटल पेमेंट और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की भी बात कही. उन्होंने भारत के UPI को इसका उदाहरण बताया. गोयल ने कहा कि UPI फिलहाल 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है. उन्होंने BRICS सदस्य और पार्टनर देशों से अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि BRICS देशों को एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहिए. इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में पेमेंट की प्रक्रिया आसान हो सकती है और डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है.

गोयल के मुताबिक, भारत में UPI पर हर साल 250 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं. उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुनिया के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधे से ज्यादा हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.

प्रोफेशनल्स के लिए भी आसान हो आवाजाही

गोयल ने BRICS देशों के बीच प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान बनाने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में प्रोफेशनल डिग्री और योग्यताओं को मान्यता देने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए. उनके मुताबिक, सर्विस सेक्टर के व्यापार को भी वास्तविक रूप से खोलने की जरूरत है. इससे एक देश के प्रोफेशनल्स को दूसरे BRICS देशों में काम करने और सेवाएं देने के ज्यादा मौके मिल सकते हैं.

ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में बड़े मौके

गोयल ने कहा कि भारत के पास BRICS देशों में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा प्रोडक्ट्स का निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं. इसके अलावा कृषि, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और सर्विस सेक्टर में भी BRICS देश मिलकर काम कर सकते हैं. उन्होंने इन क्षेत्रों में नई तकनीक और इनोवेशन के लिए साझेदारी बढ़ाने की बात कही.

गोयल ने BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ने का भी सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि एग्री-टेक कंपनियां मिलकर किसानों के लिए नई तकनीक और समाधान तैयार कर सकती हैं. खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के बड़े क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है.

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