ग्लोबल ट्रैवल मोबिलिटी और पासपोर्ट की ताकत को दर्शाने वाले ‘ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026’ के ताजा आंकड़े के अनुसार भारत ने दुनिया में पासपोर्ट मामले में बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया है. भारत एक बार फिर टॉप 100 की लिस्ट में जगह बनाने में असफल रहा है. सबसे टॉप में स्वीडन का दबदबा है और ताजा आंकड़े के अनुसार इस नए इंडेक्स के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट अब खिसककर 125वें पायदान पर आ चुका है.
ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 (Global Passport Index 2026) की ताजा रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है. जिससे अब सिर्फ 26 देशों में वीजा-फ्री एंट्री मिलेगी.
‘ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026’ के ताजा आंकड़े के अनुसार अमेरिका और फ्रांस भी टॉप 10 से बाहर हो गए हैं वहीं, भारत भी अब खिसककर 125वें पायदान पर आ चुका है. अब भारतीय पासपोर्ट धारक केवल 26 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.
पिछले साल थोड़ी बेहतरी के बावजूद यह टॉप 100 से बाहर ही रहा. लेकिन 2026 की इस नई रिपोर्ट ने देश को फिर से तगड़ा झटका दिया है. भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग अब नामीबिया और चीन से पीछे है, जबकि टॉप 10 में स्वीडन और स्विट्जरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का दबदबा है.
इतना ही नहीं, भारत फिलीपींस, मोरक्को और उज़्बेकिस्तान जैसे विकासशील देशों से भी इस रेस में पिछड़ गया है. सिर्फ मन को तसल्ली देने वाली यही बात है कि यह अजरबैजान और किर्गिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं से थोड़ा आगे चल रहा है.
रैंकिंग गिरने का सीधा असर भारतीय नागरिकों की बिना वीजा यात्रा करने की क्षमता पर पड़ा है. अब यह केवल 26 जगहों पर बिना वीजा के जाने की सुविधा देता है. इनमें भूटान, नेपाल, जमैका, मकाऊ, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, अंगोला और बारबाडोस जैसे चुनिंदा देश और क्षेत्र शामिल हैं.
इसके विपरीत US, UK, जर्मनी, फ्रांस, चीन और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में जाने के लिए भारतीयों को आज भी एक लंबी वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
भारत के पड़ोसी देशों में चीन 104वें स्थान पर है, वहीं बांग्लादेश 166वें, नेपाल 164वें और पाकिस्तान 188वें स्थान पर है. पाकिस्तान इस इंडेक्स में सबसे निचले पायदानों के करीब है. जबकि टॉप 10 में जगह बनाने वाला सिंगापुर इकलौता एशियाई देश है.
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