हेंमत शर्मा, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाला इंदौर अब एक बार फिर पेयजल व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर के मूसाखेड़ी क्षेत्र की अजय बाग कॉलोनी में पिछले दो महीनों से नलों में काला और बदबूदार पानी आने की शिकायत है। हालात ऐसे हैं कि करीब 400 परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और कई लोगों के बीमार पड़ने की बात सामने आ रही है।
रहवासियों का आरोप है कि हर सुबह पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद शुरुआती 10 से 15 मिनट तक नलों से काला और दुर्गंधयुक्त पानी निकलता है। पानी की बदबू इतनी तेज होती है कि उसका उपयोग पीने या घरेलू कामों में करना भी मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि यह समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है।
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गंदे पानी से बीमार पड़ रहे लोग
कॉलोनीवासियों का कहना है कि दूषित पानी के कारण कई घरों में लोग बीमार हो रहे हैं। सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर है। अधिकांश घरों में बोरिंग की सुविधा नहीं होने से लोग पूरी तरह नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में गंदा पानी आने से उनके पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचता। रहवासियों का आरोप है कि कई बार नगर निगम को शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
शिकायतें बंद, लेकिन समस्या नहीं
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और नगर निगम के 311 एप पर कई बार शिकायत दर्ज कराई। लेकिन स्थायी समाधान किए बिना ही शिकायतों का निराकरण दिखाकर उन्हें बंद कर दिया गया। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। रहवासियों का कहना है कि यदि शिकायतें कागजों में ही खत्म कर दी जाएं और जमीनी स्तर पर समस्या जस की तस बनी रहे, तो शिकायत व्यवस्था का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
नगर निगम भी मान चुका है बड़ी समस्या
जानकारी के अनुसार नगर निगम को पानी से जुड़ी जितनी शिकायतें मिलती हैं, उनमें करीब 10 प्रतिशत शिकायतें गंदे पानी से संबंधित होती हैं। निगम का मानना है कि कई क्षेत्रों में पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनें इस समस्या की बड़ी वजह हैं। हालांकि, सवाल यह है कि जब समस्या और उसकी वजह दोनों प्रशासन के सामने हैं, तो प्रभावित क्षेत्रों में अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
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400 परिवारों का सवाल— आखिर कब मिलेगा साफ पानी?
दो महीने से गंदे पानी की समस्या झेल रहे मूसाखेड़ी के रहवासी अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं। लोगों का कहना है कि स्वच्छता में नंबर-1 शहर का दावा तभी सार्थक होगा, जब हर घर तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचे।
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