हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर नगर निगम में संपत्तिकर खातों के नामांतरण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। 354 संपत्तिकर खातों में नियमों को दरकिनार कर नाम बदलने के आरोप में साइबर सेल ने FIR दर्ज की है। मामले में नगर निगम के 6 कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कथित तौर पर यह पूरा खेल चलता रहा।

बिना प्रक्रिया और दस्तावेज बदल दिए नाम

जांच के मुताबिक, कई संपत्तिकर खातों में निर्धारित प्रक्रिया, सक्षम अनुमति और जरूरी दस्तावेजों के बिना नाम बदलने की बात सामने आई है। आरोप है कि सिस्टम में एंट्री कर 354 खातों का नामांतरण कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू की और FIR दर्ज की।

रियाज अंसारी समेत 6 कर्मचारी आरोपी

FIR में रियाज अंसारी, संजय यादव, सौरभ तिवारी, संतोष मालवीय, अजय सोलंकी और आउटसोर्स कर्मचारी सागर पंवार को आरोपी बनाया गया है। इन कर्मचारियों की भूमिका और सिस्टम में किए गए बदलावों को लेकर जांच की जा रही है।

उपायुक्तों की लॉगिन ID का भी जिक्र

मामले में सबसे बड़ा सवाल तत्कालीन उपायुक्तों की लॉगिन ID के कथित दुरुपयोग को लेकर है। जांच में इन लॉगिन ID के इस्तेमाल का जिक्र किया गया है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित तत्कालीन उपायुक्तों को FIR में आरोपी नहीं बनाया गया है। यही सवाल अब इस पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है अगर अधिकारियों की लॉगिन ID का इस्तेमाल हुआ तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?

दलालों की भूमिका भी सामने आई, लेकिन कार्रवाई नहीं

जांच के दौरान नामांतरण के इस कथित खेल में दलालों की भूमिका सामने आने की बात भी कही जा रही है। सवाल यह है कि अगर दलालों के जरिए खातों में नाम बदलवाए जा रहे थे तो FIR में उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

354 खातों ने खोली सिस्टम की पोल

354 संपत्तिकर खातों में नाम बदलने का मामला सिर्फ कर्मचारियों की भूमिका तक सीमित नहीं दिखता। यह मामला नगर निगम के डिजिटल सिस्टम, लॉगिन सुरक्षा और नामांतरण प्रक्रिया की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जांच में यह साफ होना बाकी है कि इन 354 खातों में किसके कहने पर नाम बदले गए, किसे इसका फायदा मिला, लॉगिन ID का इस्तेमाल किसने किया और इस पूरे नेटवर्क में दलालों से लेकर अधिकारियों तक किस-किस की भूमिका थी। एक साथ 354 खातों में बदलाव ने नगर निगम की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सिस्टम में इतनी बड़ी गड़बड़ी इतने महीनों तक पकड़ में क्यों नहीं आई?

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