हेमंत शर्मा, इंदौर। Indore News: इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत 8 सितंबर को PM मोदी कर सकते हैं। इंदौर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आधे घंटे में 1.50 लाख के दो मोबाइल खोज निकाले। वहीं जू में शेरनी सुंदरी ने दो शावकों को जन्म दिया है। रेलवे की सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट की शुरुआत जल्द
लंबे समय से इंतजार कर रहे इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। छोटा उदयपुर-धार रेल लाइन परियोजना के तहत डेकाकुंड से टांडा रोड के बीच बने करीब 15.77 किलोमीटर लंबे नए रेल ट्रैक पर सीआरएस ट्रायल पूरा हो चुका है। निरीक्षण के बाद जारी सीआरएस रिपोर्ट में यात्री ट्रेन संचालन के लिए अधिकतम 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद अब इस रेलखंड पर यात्री ट्रेन शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।

8 सितंबर को हो सकता है बड़ा शुभारंभ
रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 सितंबर को वडोदरा जाने का प्रस्तावित कार्यक्रम है। इसी दौरान प्रतापनगर से टांडा रोड के बीच चलने वाली नई मेमू ट्रेन का शुभारंभ किए जाने की संभावना जताई जा रही है।रेलवे ने भी 8 सितंबर के संभावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।अगर कार्यक्रम तय होता है तो यह आदिवासी बहुल और लंबे समय से रेल कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
प्रतापनगर से टांडा रोड के बीच दौड़ेगी मेमू?
पश्चिम रेलवे की ओर से प्रतापनगर से टांडा रोड के बीच प्रतिदिन एक नई मेमू ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।अब रेलवे बोर्ड की मंजूरी और अंतिम कार्यक्रम के बाद ट्रेन संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को सीधे तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है और लंबे समय से रेल कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे लोगों को नई सुविधा मिल सकती है।
इंदौर-दाहोद रेल लाइन के लिए अहम कड़ी
छोटा उदयपुर-धार रेल लाइन परियोजना को इंदौर-दाहोद रेल कनेक्टिविटी के बड़े प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।इस रेल परियोजना के पूरा होने से मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच रेल संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही आदिवासी अंचलों के कई क्षेत्रों को भी बेहतर रेल सुविधा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
ट्रायल के बाद अब यात्री ट्रेन का इंतजार
डेकाकुंड से टांडा रोड के बीच 15.77 किलोमीटर के नए ट्रैक पर सीआरएस ट्रायल होना इस प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है।सीआरएस निरीक्षण के बाद यात्री ट्रेन चलाने के लिए 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की अधिकतम गति की अनुमति मिलना संकेत देता है कि अब इस ट्रैक पर नियमित यात्री सेवा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।अब सबकी नजर 8 सितंबर पर है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वडोदरा कार्यक्रम के दौरान इस नई मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जाएगी। सालों से रेल कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे मालवा और आदिवासी अंचल के लिए अब उम्मीद की नई पटरी बिछती नजर आ रही है।
पुलिस ने आधे घंटे में खोजे 1.50 लाख के दो मोबाइल
दौर एयरपोर्ट पर एक महिला यात्री के लिए उस वक्त परेशानी खड़ी हो गई, जब करीब 1.50 लाख रुपये कीमत के दो मोबाइल फोन टैक्सी में ही छूट गए। महिला ने तत्काल एयरपोर्ट पर मौजूद पुलिस से मदद की गुहार लगाई। पुलिस ने भी बिना समय गंवाए तकनीक की मदद से टैक्सी को ट्रेस किया और महज आधे घंटे में दोनों मोबाइल बरामद कर महिला को लौटा दिए।
CCTV से शुरू हुई मोबाइल की तलाश
महिला को जब पता चला कि उसके दोनों मोबाइल टैक्सी में छूट गए हैं, तो उसने एयरपोर्ट पुलिस से संपर्क किया। पुलिस टीम ने एयरपोर्ट के CCTV कैमरों की मदद से टैक्सी की पहचान और उसका रूट ट्रेस करना शुरू किया।
POS मशीन बनी अहम कड़ी
टैक्सी की पहचान होने के बाद पुलिस ने वाहन से जुड़े POS मशीन के रिकॉर्ड की मदद से वाहन मालिक का मोबाइल नंबर हासिल किया। इसके बाद पुलिस ने टैक्सी चालक से संपर्क किया और उसे पूरे मामले की जानकारी दी।

आधे घंटे में बरामद हुए दोनों मोबाइल
पुलिस की तत्परता से टैक्सी चालक से संपर्क हो गया और दोनों मोबाइल फोन बरामद कर लिए गए। सबसे खास बात यह रही कि महिला की कोलकाता जाने वाली फ्लाइट रवाना होने से पहले ही उसके मोबाइल उसे वापस मिल गए।
मोबाइल लौटाकर कराई महिला की बोर्डिंग
मोबाइल मिलने के बाद पुलिस ने महिला यात्री को उसके फोन सुरक्षित रूप से वापस किए और समय रहते उसकी कोलकाता फ्लाइट में बोर्डिंग भी कराई। अचानक आई परेशानी के बीच पुलिस की इस तत्परता से महिला को बड़ी राहत मिली।
तकनीक और तत्परता का बेहतर उदाहरण
CCTV से टैक्सी की पहचान, POS मशीन से वाहन मालिक का नंबर हासिल करना और फिर चालक से संपर्क कर मोबाइल बरामद करना—पूरी कार्रवाई में पुलिस ने तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया।महिला यात्री ने समय पर मदद करने और उसके कीमती मोबाइल वापस दिलाने के लिए इंदौर पुलिस का आभार जताया। यह कार्रवाई बताती है कि सही समय पर पुलिस की तत्परता और तकनीक का इस्तेमाल किसी यात्री की बड़ी परेशानी को कुछ ही मिनटों में दूर कर सकता है।
इंदौर जू में गूंजी दहाड़, बढ़ा शेरों का कुनबा, शेरनी सुंदरी ने दिया दो शावकों को जन्म
शहर के चिड़ियाघर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। इंदौर जू में शेरों का कुनबा बढ़ गया है। शेरनी सुंदरी ने दो शावकों को जन्म दिया है। दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं और फिलहाल अपनी मां के साथ ही हैं।
करीब तीन दिन पहले हुआ जन्म
जू प्रबंधन के मुताबिक, दोनों शावकों का जन्म करीब तीन दिन पहले हुआ है। खास बात यह है कि पिछले करीब एक सप्ताह से शेरनी सुंदरी दिखाई नहीं दे रही थी। अब उसके साथ दो नन्हे शावकों की मौजूदगी से जू प्रबंधन भी उत्साहित है।
मां के साथ सुरक्षित रखे गए शावक
फिलहाल दोनों शावकों को उनकी मां सुंदरी के साथ ही रखा गया है। जू प्रबंधन लगातार मां और दोनों शावकों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। शावकों की सुरक्षा को देखते हुए विशेष निगरानी की जा रही है, ताकि शुरुआती दिनों में उन्हें किसी तरह का खतरा न हो।
अभी जेंडर की पहचान नहीं
नवजात शावकों का अभी जेंडर आइडेंटिफिकेशन नहीं किया गया है। प्रबंधन फिलहाल उन्हें मां की देखरेख में सुरक्षित रखने पर फोकस कर रहा है। उचित समय के बाद शावकों की स्वास्थ्य जांच और जेंडर की पहचान की जाएगी।
इंदौर जू में अब 14 हुए शेर
दो नए शावकों के जन्म के बाद इंदौर जू में शेरों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। यह इंदौर चिड़ियाघर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लगातार वन्यजीवों के कुनबे में हो रही बढ़ोतरी से जू में रौनक भी बढ़ रही है।
रेलवे के ‘पेस्ट कंट्रोल’ पर सवाल! लाखों का ठेका, फिर भी AC कोच में चूहे-कॉकरोच
रेलवे की सफाई और पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में AC से लेकर स्लीपर कोच तक चूहे और कॉकरोच मिलने की शिकायतों के बाद रेलवे ने अब कार्रवाई का दावा किया है। पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना, नोटिस और जिम्मेदार कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।लेकिन कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेलवे ट्रेनों में नियमित पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल के लिए लाखों रुपये का ठेका देता है, तो यात्रियों के बीच चूहे और कॉकरोच आखिर पहुंच कैसे रहे हैं?
तीन साल का ठेका करीब 1.56 करोड़ का… फिर भी ट्रेन में चूहे!
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इंदौर और डॉ. आंबेडकर नगर कोचिंग डिपो में ट्रेनों/कोचों के पेस्ट कंट्रोल, रोडेंट कंट्रोल और फॉगिंग के लिए तीन साल का ई-टेंडर जारी किया था।टेंडर दस्तावेज के मुताबिक इसकी अनुमानित लागत ₹1,55,92,083.75 यानी करीब 1.56 करोड़ रुपये थी। यानी मोटे तौर पर यह राशि करीब ₹52 लाख सालाना बैठती है। इस हिसाब से प्रतिदिन की औसत लागत करीब ₹14 हजार के आसपास बनती है। यह केवल गणितीय औसत है; वास्तविक भुगतान काम की शर्तों और बिलों के अनुसार अलग हो सकता है।अब सवाल उठना लाजिमी कि इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था के बावजूद अगर यात्री को अपने बच्चे को चूहों से बचाने के लिए AC डक्ट तक बेडशीट से बंद करना पड़े, तो पेस्ट कंट्रोल सिस्टम की सफलता का पैमाना क्या है?
AC कोच में बच्ची, डक्ट से निकलते रहे चूहे
इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में सामने आई शिकायत ने रेलवे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।रिपोर्ट के मुताबिक एक महिला यात्री करीब 16 घंटे की यात्रा के दौरान AC डक्ट के आसपास से चूहों के बार-बार आने-जाने से परेशान रही। वह पांच महीने की बच्ची के साथ सफर कर रही थी और बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए डक्ट के आसपास बेडशीट तक लगानी पड़ी। दूसरी ओर स्लीपर कोच में यात्री ने कॉकरोच का वीडियो बनाकर रेलवे अधिकारियों को भेजा।यानी मामला किसी एक कोच तक सीमित नहीं रहा, AC और स्लीपर दोनों में शिकायत सामने आई।
रेलवे ने क्या किया?
केमिकल स्प्रे, फ्यूमिगेशन और गैप सील!
शिकायतों के बाद डॉ. आंबेडकर नगर कोचिंग डिपो में जांच की गई।
रेलवे की ओर से अब
कोच में केमिकल स्प्रे और फ्यूमिगेशन
सघन पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल
रूफ पैनल के गैप को सील
चूहे भगाने की दवा
एंटी-रोच जेल
अन्य कोचों में भी पेस्ट कंट्रोल जैसी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है।
साथ ही पेस्ट कंट्रोल एजेंसी को नोटिस जारी कर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है और जिम्मेदार कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।
लेकिन ₹10 हजार का जुर्माना कितना बड़ा ‘सबक’?
यहीं रेलवे की कार्रवाई पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है।एक तरफ पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल के लिए तीन साल में करीब 1.56 करोड़ रुपये का अनुमानित ठेका, दूसरी तरफ यात्रियों के सामने चूहे और कॉकरोच और फिर कार्रवाई के नाम पर ₹10 हजार का जुर्माना। रेलवे के अपने आधिकारिक पेस्ट कंट्रोल दस्तावेज में भी कोच में कॉकरोच, रोडेंट, बेडबग या मच्छर की यात्री शिकायत पर प्रति शिकायत ₹1,000 की पेनल्टी का प्रावधान बताया गया है। वहीं कोचिंग डिपो परिसर में रोडेंट इंफेस्टेशन का निर्धारित स्तर हासिल न होने पर ₹10 हजार की पेनल्टी का प्रावधान भी मौजूद है। यानी सवाल यह नहीं कि जुर्माना लगाया गया या नहीं—सवाल यह है कि जुर्माने की रकम इतनी है कि एजेंसी के लिए लापरवाही वास्तव में महंगी साबित हो?
हर 15 दिन पेस्ट कंट्रोल का दावा, फिर भी चूहों का ‘कब्जा’ कैसे?
पश्चिम रेलवे की ओर से पहले यह बताया गया था कि ट्रेनों के कोच में हर 15 दिन पेस्ट कंट्रोल किया जाता है। ऊना-इंदौर एक्सप्रेस में बुजुर्ग यात्री की नाक पर चूहे के काटने की घटना के बाद रेलवे ने पूरी ट्रेन की दोबारा जांच की बात भी कही थी। रेलवे की एक अन्य आधिकारिक जानकारी में AC कोचों के लिए पेस्ट कंट्रोल की नियमित आवृत्ति भी निर्धारित होने का उल्लेख मिलता है। लेकिन अगर नियमित पेस्ट कंट्रोल के बावजूद AC डक्ट से चूहे निकल रहे हैं और स्लीपर में कॉकरोच घूम रहे हैं, तो सवाल सीधे निगरानी और ठेकेदार के काम की गुणवत्ता पर पहुंचता है।
एक के बाद एक शिकायत… रेलवे की नींद आखिर कब खुलेगी?
यह पहली घटना भी नहीं है। हाल ही में ऊना-इंदौर एक्सप्रेस के AC कोच में 78 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी की नाक पर चूहे के काटने की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद भी पेस्ट कंट्रोल और यात्री सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। अब कुछ ही समय बाद इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में फिर चूहे और कॉकरोच की शिकायतें सामने आ गईं।यानी एक घटना पर कार्रवाई, फिर दूसरी ट्रेन में वही समस्या—क्या रेलवे की कार्रवाई समस्या का स्थायी समाधान कर पा रही है?
सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की सुरक्षा का है
ट्रेन में चूहों की मौजूदगी सिर्फ गंदगी का मामला नहीं है। चूहे तारों, सीटों और कोच के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और यात्रियों के लिए स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा कर सकते हैं।रेलवे के अपने दस्तावेजों में भी पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था में रोडेंट और कॉकरोच की मौजूदगी को गंभीरता से लेते हुए पेनल्टी और शिकायतों का लॉग रखने का प्रावधान है। ऐसे में अब रेलवे से सिर्फ यह जवाब काफी नहीं कि ‘पेस्ट कंट्रोल करा दिया गया।’
सवाल यह है
पेस्ट कंट्रोल कब हुआ था?
किस एजेंसी ने किया था?
किस अधिकारी ने कोच को फिट घोषित किया था?
शिकायत के बावजूद चूहे कोच में कैसे पहुंचे?
और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पेस्ट कंट्रोल पर करोड़ों का ठेका है, तो यात्रियों को चूहों और कॉकरोच के साथ सफर क्यों करना पड़ रहा है?
रेलवे ने फिलहाल ₹10 हजार का जुर्माना लगाकर, नोटिस देकर और दोबारा पेस्ट कंट्रोल कराकर कार्रवाई का दावा किया है। लेकिन यात्रियों को कार्रवाई की कागजी तस्वीर नहीं, चूहा-मुक्त और सुरक्षित कोच चाहिए।वरना हर शिकायत के बाद स्प्रे और फ्यूमिगेशन का वही खेल चलता रहेगा और रेलवे की पटरियों पर ट्रेन के साथ-साथ चूहे भी बेखौफ दौड़ते रहेंगे।
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