हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर में कानून के रखवालों पर ही कानून तोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व एसीपी राकेश गुप्ता से जुड़े विवाद में पुलिस की दबंगई खुलकर सामने आई है। आरोप है कि वारंट के नाम पर पुलिस टीम ने घर का दरवाजा तोड़ा, गाली-गलौज की और जबरन आरोपी को उठा ले गई। मामला विजय नगर क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस गौरव जैन के घर पहुंची थी। परिवार ने दरवाजा नहीं खोला तो पुलिस ने नियमों को दरकिनार करते हुए सीधे दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद घर में घुसकर दबिश दी गई और जैन को पकड़ लिया गया। सवाल यह है कि क्या अब इंदौर में पुलिस कार्रवाई का मतलब ‘तोड़फोड़ और दादागिरी’ रह गया है?

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यहीं नहीं, आरोप और भी गंभीर हैं। जैन को ग्वालियर पेशी पर ले जाने के दौरान वकील से बात कराने के नाम पर 25 हजार रुपये वसूलने की बात सामने आई है। यानी गिरफ्तारी के साथ-साथ वसूली का खेल भी चलता रहा।पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और डीसीपी कुमार प्रतीक से शिकायत की। जांच में मामला सही पाया गया तो तुरंत कार्रवाई करते हुए थानेदार संजय विश्नोई समेत 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। एक हवलदार की भूमिका अभी जांच के दायरे में है।

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आरोप है कि गौरव जैन पर कई शहरों में केस दर्ज हैं और वारंट भी जारी हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या वारंट के नाम पर पुलिस को कानून तोड़ने की छूट मिल जाती है? इंदौर में यह मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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