Lalluram Desk. पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ इंद्रा नूयी का कहना है कि भारत हर किसी के बस की बात नहीं है। हां, अगर आपको अफरा-तफरी (chaos) पसंद है और आप उसके बीच भी ज़िंदगी का मज़ा ले सकते हैं, तो आपका मन भारत से कभी नहीं भरेगा।

भारत में जनमी और पली-बढ़ी नूयी, हूवर इंस्टीट्यूशन के लिए लीडरशिप और इनोवेशन पर कोंडोलीज़ा राइस से बात कर रही थीं। राइस ने उनसे पूछा कि वह अमेरिकी स्टूडेंट्स से भारत घूमने और वहां का अनुभव लेने के लिए क्या कहेंगी, क्योंकि वे चीन तो जाते हैं लेकिन भारत उतनी संख्या में नहीं जाते।

उन्होंने राइस से कहा, “मुझे लगता है कि चीन के बारे में दिलचस्प बात यह है कि वह काफी हद तक एक जैसा (homogeneous) है। ठीक है, चीनी भाषा के अलग-अलग रूप हो सकते हैं, लेकिन यह काफी हद तक एक जैसा देश है। एक विज़िटर के तौर पर वहां जाकर कुछ समय बिताना, भारत की तुलना में चीन में आसान है। भारत एक अफरा-तफरी वाला देश है। भारत की खूबसूरती उसके इसी शोर-शराबे और अव्यवस्था में है। पूरी तरह से अफरा-तफरी।”

उन्होंने कहा, “हां, अगर आप भारत से वाकिफ हैं, आपने पहले भारत की यात्रा की है और आपको अपने आस-पास की वह अफरा-तफरी पसंद है, तो आप वापस जाएंगे। यह किसी नशे की तरह है। आपको इसकी लत लग जाती है। लेकिन अगर आपको सब कुछ व्यवस्थित (order) चाहिए, अगर आपको साफ-सुथरी ज़िंदगी पसंद है, तो भारत को संभालना आपके लिए नामुमकिन होगा। जब आप सड़कों पर गाड़ियों के साथ गायों को देखते हैं, तो आप सोचते हैं, ‘यहां आखिर क्या हो रहा है?’ अरे, हम जानते हैं कि गाड़ियों से कैसे बचना है और आगे बढ़ते रहना है, ठीक है? भारत में ज़िंदगी ऐसी ही है।”

नूयी ने आगे कहा कि भारतीयों का नज़रिया होता है कि ‘यह भी गुज़र जाएगा’ और हो सकता है कि भारत और तरक्की करे, लेकिन सड़कों पर गायें यहां की ज़िंदगी का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इसके उलट, अमेरिका के लोग बहुत “बिगड़े हुए” (spoiled) हैं।

नूयी ने कहा कि वह अपने बच्चों से कहती हैं कि वे खुशकिस्मत हैं कि उन्हें 24/7 खुलने वाले स्टोर और हफ्ते के सातों दिन खुलने वाले मॉल मिलते हैं। उन्होंने कहा, “यह सुविधा किसी और देश में नहीं है। आप यूरोप जाएं, तो वहां अक्सर सब कुछ बंद रहता है। इसलिए मैं यहां बैठकर सोचती हूं कि आपको अंदाज़ा भी नहीं है कि आप यहां कितनी अच्छी स्थिति में हैं। तो बस इन आज़ादियों का आनंद लें।”

पेप्सिको की पूर्व प्रमुख ने कहा कि वह चीन को अंधेरे दौर से बाहर निकालने के लिए चीनी व्यवस्था का सम्मान करती हैं। उन्होंने इस बड़े अंतर को रेखांकित करते हुए कहा, “और वे एक विश्व शक्ति बन गए हैं क्योंकि उन्होंने यह सब केंद्रीय नियंत्रण से किया। भारत अभी भी विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि यहां लोकतंत्र है, और जब हर किसी के पास वोट और अपनी बात कहने का अधिकार होता है, तो प्रगति धीमी होती है। लेकिन मुझे खुशी है कि व्यवस्था ऐसी ही है।”

उन्होंने कहा कि भारत के हर ठीक-ठाक आकार वाले शहर में एक कोर्टहाउस (अदालत) होता है, ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका के शहरों में होता है। उन्होंने कहा, “चीन में कोई कोर्टहाउस नहीं होता क्योंकि सरकार ही नियम बनाती है और फैसले लेती है। और यहीं पर समस्या पैदा होती है। और वह अलगाव, यानी हमारी न्यायपालिका का इतना स्पष्ट रूप से दिखना ही लोगों को यह भरोसा दिलाता है कि देश में उनके भी अधिकार हैं।”

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