शिखिल ब्यौहार, भोपाल। सरकार की नीति में महंगाई को लेकर कर्मचारियों अधिकारियों को महंगाई भत्ता और पेंशनर्स को महंगाई राहत दी जाती है। परिस्थितियों के चलते रीड की हड्डी कहे जाने वाले कर्मचारियों अधिकारियों को महंगाई तो मिली लेकिन इससे राहत नहीं। दरअसल, मध्य प्रदेश के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता और महंगाई राहत न मिलने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 से ही 2% महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है, लेकिन आधा साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने इसे लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया है। इस देरी के चलते सरकार के पास कर्मचारियों का लगभग 450 करोड़ रुपए का बकाया इकट्ठा हो चुका है।

सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमा शंकर तिवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीते 7 महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब कई बार बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल-डीजल सहित सभी खाद्य सामग्रियां महंगी हो चुकी हैं। इस कमरतोड़ महंगाई का सामना करने के लिए कर्मचारियों को समय पर भत्ता मिलना जरूरी था, लेकिन सरकार ने यह राशि रोककर अपने 450 करोड़ रूपये तो बचा लिए, पर कर्मचारियों की जेब खाली कर दी। अक्सर यह देखा गया है कि यह सरकार आदेश जारी करने के बाद भी बीच के अंतर की राशि को डकार जाती है। तिवारी ने बताया कि केंद्र इन दोनों प्रावधानों के तहत 60% दे रहा है। प्रदेश में फिलहाल 58% ही है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप

कर्मचारी संघ का यह भी आरोप है कि वर्तमान मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में कार्यरत कर्मचारियों को तो एरियर की राशि मिल रही है, लेकिन सेवानिवृत्त वृद्ध कर्मचारियों अधिकारियों को पूर्ण एरियर से वंचित रखा जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के साथ किया जा रहा यह व्यवहार बेहद दुखद है, क्योंकि हर कार्यरत कर्मचारी को एक दिन रिटायर होना ही है। सरकार को तत्काल प्रभाव से पेंशनर्स के लिए राहत की खबर देनी चाहिए।

महंगाई का भत्ता और राहत नहीं देना चाहते

इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विक्रम चौधरी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदेश में महंगाई सरकारी कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की वजह से बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल उन्हीं कामों के लिए कर्ज ले रही है जहां भ्रष्टाचार की गुंजाइश है। पिछले 20 सालों से कर्मचारियों के हक को मारा जा रहा है। चाहे वह प्रमोशन का मामला हो या महंगाई भत्ते का, सरकार हमेशा पैसों की कमी का रोना रोती है। बीजेपी सरकार का यही चाल है और यही चरित्र है कि महंगाई तो देती है सरकार लेकिन प्रावधानों के अनुसार राहत और भट्ट नहीं देना चाहती। प्रदेश के कर्मचारी अब दोहरी मार झेल रहे हैं।

बीजेपी का दावा: जल्द लिया जाएगा फैसला

दूसरी तरफ सत्तापक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हमेशा कर्मचारी हित में बड़े फैसले लिए हैं और पूर्व में केंद्र के समान भत्ता दिया भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र द्वारा की गई हालिया वृद्धि का लाभ भी जल्द ही प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को दिया जाएगा। भाजपा सरकार कर्मचारियों को केंद्र के समान या उससे बेहतर सुविधाएं देने के लिए संकल्पित है।

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