पटना। बिहार के निवासियों के लिए महंगाई का दोहरा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद, अब सुधा ब्रांड के दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।
ईंधन की कीमतों में आग
पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। ताजा बदलाव के बाद पटना में पेट्रोल की कीमत 111.11 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 97.14 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें (जो अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं) कम नहीं हुईं, तो भविष्य में और भी इजाफा संभव है।
सुधा दूध और डेयरी उत्पाद महंगे
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (COMFED) ने 25 मई 2026 से राज्य भर में सुधा के उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का निर्णय लिया है। पशुपालकों से खरीदी जाने वाली दूध की दरों में वृद्धि और बढ़ती परिवहन व बिजली लागत को इसका मुख्य कारण बताया गया है। दूध के अलावा पनीर, बटर, पेड़े, रसगुल्ला और गुलाबजामुन जैसे उत्पादों के दाम भी बढ़ गए हैं।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर
ईंधन और दूध की कीमतों में इस वृद्धि का असर केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा:
- परिवहन लागत: मालभाड़ा बढ़ने से अन्य राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे होंगे।
- खेती पर दबाव: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट के संचालन के लिए किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा, जिससे कृषि उत्पादन की लागत बढ़ेगी।
- सार्वजनिक परिवहन: ऑटो, बस और स्कूल वाहनों के किराए में भी वृद्धि की संभावना है।
कीमतों का गणित
ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर निर्भर करती हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ के तहत रोजाना दरें अपडेट करती हैं। बेस प्राइस में रिफाइनिंग शुल्क, केंद्र का उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी), डीलर कमीशन और अंत में राज्य सरकार द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) जुड़ने के बाद उपभोक्ता तक अंतिम कीमत पहुंचती है।
महंगाई का यह चक्र आम परिवारों के मासिक बजट को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है, जिससे आम जनता पर आर्थिक संकट गहरा गया है।

