दुर्गेश राजपूत, ​नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले की पिपरिया कोर्ट ने 14 साल पुराने एक मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पिपरिया बीजेपी मंडल अध्यक्ष बलराम ठाकुर और उनके साथी दिनेश छीपा को पुलिसकर्मियों से मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने का दोषी पाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों आरोपियों को 2-2 साल के कारावास की सजा सुनाई है।

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थाने में घुसकर की थी मारपीट

अभियोजन के अनुसार तत्कालीन समय में थाना पिपरिया में आरक्षक राजेश सोनी और प्रधान आरक्षक अखयराम ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान बलराम ठाकुर और दिनेश छीपा अपने अन्य साथियों के साथ थाने में घुसे। इन लोगों ने न केवल पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की, बल्कि ड्यूटी पर तैनात आरक्षक के साथ धक्का-मुक्की कर मारपीट भी की। आरोपियों ने थाने का सरकारी रजिस्टर फेंक दिया और सरकारी काम में व्यवधान पैदा किया।

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14 साल तक चली कानून की लंबी लड़ाई

​मामले की पैरवी कर रहे एडीपीओ चौधरी विक्रम सिंह ने अदालत में 15 गवाहों के बयान और ठोस साक्ष्य पेश किए। दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दिया। ​14 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक पद पर क्यों न हो। फैसले के बाद क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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