दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला चिकित्सालय से संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक गंभीर रूप से घायल मरीज को एंबुलेंस के लिए दो घंटे तक तड़पना पड़ा। आरोप है कि अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने डोनेटेड सरकारी एंबुलेंस को मरीजों के लिए देने से इनकार कर दिया और इसे ‘VVIP ड्यूटी’ के लिए आरक्षित बताया। इस घोर लापरवाही पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

READ MORE: ‘रेत की फैक्ट्री’ का भंडाफोड़: SDM की रेड में जेसीबी-पोखलेंड जब्त; 10 एकड़ में चल रहा था खेल, मुखबिर की सूचना पर प्रशासन का ताबड़तोड़ छापा

पूरा मामला खारदा निवासी 40 वर्षीय सुरेंद्र चौहान सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल रेफर कर दिया। जिला मुख्यालय पर तत्काल कोई 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन परेशान होते रहे। जब परिजनों ने प्रशासन से गुहार लगाई, तो CMHO डॉ. नरसिंह गहलोत ने सिविल सर्जन को अस्पताल की नई डोनेटेड एंबुलेंस से मरीज को भेजने के निर्देश दिए। निर्देशों के बावजूद सिविल सर्जन ने कथित तौर पर एंबुलेंस देने से मना कर दिया और सवाल उठाया कि डीजल की व्यवस्था कौन करेगा? उन्होंने तर्क दिया कि यह वाहन सिर्फ VVIP ड्यूटी के लिए है, मरीजों के परिवहन के लिए नहीं। 

READ MORE: लकड़ी बीनने गई थी लीला बाई, आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर ले ली जान; कब जागेगा प्रशासन?

मरीज को दो घंटे की देरी के बाद भोपाल भेजा जा सका। CMHO डॉ. गहलोत ने इसे अमानवीय रवैया और गंभीर लापरवाही मानते हुए सिविल सर्जन को नोटिस थमा दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1), 3(2) और 3(3) का सीधा उल्लंघन है। दूसरी ओर, सिविल सर्जन डॉ. सुनीता कामले ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने खुद सरकारी एंबुलेंस खड़ी करवाई थी और VVIP ड्यूटी वाली बात से साफ इनकार किया है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m