रायपुर। जब शासन संवेदनशीलता और संकल्प के साथ आगे बढ़ता है तो उसका सकारात्मक परिणाम सीधे आमजन के जीवन में दिखाई देता है और यही हो रहा है छत्तीसगढ़ की धरती पर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन से आज प्रदेश में ऐसे बहुत से बदलाव देखने को मिल रहे हैं जिसका श्रेय उनके दूरदर्शी और जनकल्याणकारी नेतृत्व को जाता है। उनके मार्गदर्शन में आयोजित “सुशासन तिहार” एक ऐसी प्रशासनिक पहल है जो आम जनता के जीवन में आशा, विश्वास और विकास का नया अध्याय भी लिख रही है।

सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविरों से यह बात स्वमेव साबित हो गया है कि जब सरकार जनता के द्वार तक पहुंचती है तो समस्याओं का त्वरित समाधान भी होता है। बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड और मंगला क्षेत्र में आयोजित शिविरों से जो तस्वीर सामने आई है वह वास्तव में सभी राज्यों के लिए प्रेरणादायक है।

बेटियों को मिला आत्मनिर्भरता का बल

रानीपारा निवासी कुमारी शशि साहू की कहानी इस शासकीय पहल के सफलता की जीवंत मिसाल है। किसी भी साधारण मजदूर परिवार से आने वाले बच्चे की तरह ही शशि के लिए भी शिक्षा जारी रखना किसी संघर्ष से कम नहीं था। पिता दिन-रात मेहनत और कोशिश तो कर ही रहे थे मगर फिर भी परिवार का पालन-पोषण और शशि की पढ़ाई सीमित आय के कारण बाधित हो रही थी।

ऐसी विपरीत परिस्थिति में मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का मिलना शशि के परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। मिलने वाली यह सहायता राशि उनके सपनों को पंख देने का माध्यम बनी। शशि के चेहरे पर झलकता आत्मविश्वासत इस बात की गवाही है कि अब वह अपने भविष्य को लेकर पहले से अधिक आशान्वित है।

इसी तारतम्य में कुड़ूदंड की रहने वाली शिवांगी की कहानी भी उतनी ही प्रेरक है। एक श्रमिक परिवार की बेटी होने के बावजूद शिवांगी ने अपने सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। आर्थिक तंगी के कारण कई बार उनकी पढ़ाई बीच में रुकने की कगार पर आ गई थी मगर हिम्मतवर बिटिया ने हार नहीं मानी।

सुशासन तिहार के समाधान शिविर से मिलने वाली 20 हजार रुपये की सहायता से राशि ने शिवांगी के मन में एक नई उम्मीद पैदा कर दी। यह आर्थिक मदद नहीं उसके परिवार के सपनों को साकार करने वाला साबित हो रहा है। शिवानी ने “सरकार की इस पहल को बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।”

किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का आधार – छत्तीसगढ़ की साय सरकार

सुशासन तिहार जहां एक ओर बेटियों को शिक्षा का संबल दे रहा है वहीं किसानों के लिए भी बेहद लाभकारी साबित हुई है। गनियारी के किसान बहोरन लाल कौशिक को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से 36 हजार रुपये की ऋण सहायता दी गई।

कृषि कार्यों के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिलना किसी भी कास्तकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। बहोरन लाल ने बताया कि इस राशि का उपयोग वे कृषि से जुड़े आवश्यक कार्यों में करेंगे जिससे उत्पादन और आय दोनों में ही वृद्धि होगी।

उनकी बातों से यह साफ़ होता है कि “सरकार की किसान हितैषी नीतियां केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं बल्कि जमीन पर उनका वास्तविक प्रभाव दिखाई दे रहा है।” सुशासन तिहार कार्यक्रम की पहल पर किसानों को समय पर ऋण की उपलब्ध से न केवल उनको आर्थिक संबल मिलता है बल्कि इससे वे आधुनिक संसाधनों का उपयोग करके बेहतर उत्पादन भी कर पाते हैं।

सुशासन का जीवंत उदाहरण बन रहा प्रदेश

सफलता की इन सभी कहानियों को सूक्ष्मता से देखी जाए तो उनमें एक समानता दिखाई देती है और वह है संघर्ष, उम्मीद और फिर कामयाबी। इन सबके केंद्र में है जनता की समस्याओं को नज़दीक से समझने और उसका समाधान करने वाली एक संवेदनशील सरकार। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन की परिकल्पना जो आकार पा रही है वह वास्तव में राष्ट्रीय तल पर प्रशंसनीय है।सुशासन तिहार सरकार और जनता के बीच विश्वास का एक मजबूत सेतु साबित हुआ है जो इस बात की ओर इशारा है कि राज्य शासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहने वाला बल्कि अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचने वाला है।

सही समय पर मिली मदद किस प्रकार जीवन की दिशा बदल सकती है। सुशासन तिहार के हितग्राही शशि, शिवांगी और बहोरन लाल जैसे अनगिनत हितग्राहियों की कहानियां यह बताती हैं कि यह उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है बल्कि यह पूरे समाज के विकास की कहानी है। क्योंकि जब बेटियां शिक्षित होंगी तब ही समाज मज़बूत हो सकता है। इसके अलावा जब किसान समृद्ध होंगे तब ही अर्थव्यवस्था सशक्त होगी और जब शासन संवेदनशील होगा तब ही हर नागरिक के जीवन में खुशहाली आएगी।

छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार जैसी पहल से न केवल वर्तमान बेहतर बन रहा है बल्कि भविष्य के लिए भी दृढ़ नींव तैयार हो रही है। आज ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाए जाने की आवश्यकता है तब ही जरूरतमंद तक इसका लाभ पहुंच सकेगा।

उम्मीद की जा रही है कि सुशासन की यह यात्रा यूं ही आगे बढ़ते रहेगी और राज्य में शशि, शिवांगी और बहोरन जैसे जरूरतमंदों के सपनों को साकार करती रहेगी। यही होगी सच्चे अर्थों में एक समृद्ध और सशक्त छत्तीसगढ़ की पहचान होगी।