हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में इन दिनों निवेश के नाम पर एक ऐसा खेल चल रहा है, जिसमें लोगों को 30 से 40 प्रतिशत तक मुनाफे का सपना दिखाकर लाखों-करोड़ों रुपए जुटाए जा रहे हैं। लल्लूराम डॉट कॉम (Lalluram.com) की एक्सक्लूसिव पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो न सिर्फ निवेशकों को सतर्क करने वाले हैं बल्कि प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हैं।

RBI के नियम क्या कहते हैं?

पड़ताल में सामने आया कि देश के बैंक और वित्तीय संस्थान फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर आमतौर पर 6% से 9% तक ब्याज देते हैं। यही दरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्तीय नियामकों की निगरानी में संचालित बैंकिंग व्यवस्था का हिस्सा हैं।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या कंपनी बिना किसी वैध वित्तीय लाइसेंस के 30% से 40% तक सालाना रिटर्न देने का दावा करती है, तो यह अपने आप में गंभीर जांच का विषय बन जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने अधिक रिटर्न का वादा अक्सर पोंजी स्कीम, अवैध जमा योजना या निवेश धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।

रिपोर्टर बनकर पहुंचे निवेशक, सामने आया पूरा खेल

लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने एक निवेशक बनकर इंदौर में संचालित एक एडवाइजरी कंपनी से संपर्क किया। बातचीत के दौरान कंपनी संचालक बृजभान सिंह ने दावा किया कि यदि कोई व्यक्ति 15 लाख रुपए निवेश करता है तो उसे सुरक्षा के नाम पर हस्ताक्षरित चेक दिए जाएंगे। संचालक ने दावा किया कि निवेश की रकम क्रिप्टोकरेंसी और शेयर बाजार में लगाई जाती है और वहां से होने वाले मुनाफे का हिस्सा निवेशकों को दिया जाता है। इतना ही नहीं, 30 लाख रुपए या उससे अधिक निवेश करने वालों को प्रॉपर्टी के दस्तावेज भी सुरक्षा के तौर पर देने की बात कही गई।

“पुलिसकर्मियों और जजों का भी पैसा लगा है”

बातचीत के दौरान संचालक ने यह भी दावा किया कि उसके पास कई पुलिसकर्मियों और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का पैसा निवेशित है। हालांकि लल्लूराम डॉट कॉम स्वतंत्र रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इस तरह के दावे निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए किए जा रहे हैं। संचालक ब्रजभान सिंह ने खुद को उत्तराखंड का निवासी बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से इंदौर में रहकर यह कारोबार संचालित कर रहा है और निवेशकों को 30 प्रतिशत तक का मुनाफा दे रहा है।

पहले भी दर्ज हो चुके हैं कई मामले

इंदौर में इससे पहले भी कई एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और निवेश के नाम पर ठगी के मामले दर्ज हो चुके हैं। कई कंपनियां निवेशकों से करोड़ों रुपए जुटाने के बाद अचानक कार्यालय बंद कर फरार हो गईं। कई पीड़ित आज भी अपने पैसों की वापसी के लिए पुलिस और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।

क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि कोई कंपनी बिना वैध अनुमति के जनता से निवेश लेकर निश्चित और असामान्य रिटर्न का वादा करती है, तो उसके खिलाफ विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर धोखाधड़ी, अवैध वित्तीय गतिविधि, निवेशकों को गुमराह करने और अनधिकृत जमा योजनाएं चलाने जैसी धाराएं लग सकती हैं। आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), पुलिस, SEBI और अन्य एजेंसियां भी जांच कर सकती हैं।

पुलिस पर भी उठ रहे सवाल

पड़ताल के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि कुछ स्थानीय स्तर पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ फर्जी एडवाइजरी कंपनियों को संरक्षण मिलता है, जिसके कारण उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यह जरूर है कि शहर में लगातार सामने आ रहे मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़ा सवाल

जब बैंक 7-8 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं, तब 30 से 40 प्रतिशत मुनाफे का दावा आखिर कैसे किया जा रहा है? क्या यह निवेश है या फिर ठगी का नया मॉडल? अब देखना होगा कि लल्लूराम डॉट कॉम (Lalluram.com) की इस एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के सामने आने के बाद इंदौर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और संबंधित एजेंसियां क्या कार्रवाई करती हैं और क्या निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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