मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को कहीं से और किसी भी स्तर पर सीजफायर और शांति वार्ता समझौता का नाम नहीं दिया जा सकता है. अभी तक कई बार ऐसा देखा गया है कि एक तरफ शांति समझौता की बात करते है तो दूसरी तरफ पता चलता है कि हमला हो गया. इसी जारी तनाव के बीच ईरान ने खोर्रमशहर मिसाइल से इजरायल पर जोरदार हमला किया है. ईरान ने हमलों के दौरान तेल अवीव, हाइफा, बेन गुरियन एयरपोर्ट और दिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बनाया गया, जिसमें भारी तबाही के दावे किए गए है.
शांति वार्ता के बीच ईरान का इजरायल पर जोरदार हमला करने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
ईरानी सैन्य अधिकारियों से जुड़े बयानों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कहा जा रहा है कि ईरान की सेना ने अपने लोगों से कहा है कि ‘ईरान के लिए प्रार्थना करें’. लेकिन अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हो सकी है. इजरायली अधिकारियों की ओर से भी हमले के दायरे, नुकसान और इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है.
ईरान का इजरायल पर हमला को देखते हुए कहा जा सकता है कि अभी वह एकदम एक अलग मूड में दिखा रहा है, क्योंकि खोर्रमशहर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में गिनी जाती है. ईरान की सबसे घातक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है. यह हवा में लगभग 19,757 km/h की गति से चलती है और एक टन से अधिक वजनी मल्टीपल वॉरहेड ले जाने में सक्षम है.
इस बीच ईरान ने अमेरिका के लिए एक संदेश जारी करते हुए कहा, ‘प्रिय अमेरिकियों, अपने राष्ट्रपति से कहो कि वे ईरान और इजरायल के बीच न आएं. इजरायल को तो घुटने टेकने पर हम एक दिन में ही मजबूर कर देंगे.
वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री ने अपने नागरिकों से कहा है कि बातचीत में चाहे कुछ भी हो, समझौता हो या न हो, मैं आपसे वादा करता हूं कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा.
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