दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में राहत देते हुए 7 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांचे गए इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 अक्टूबर को होगी।

​अदालत की कड़ी टिप्पणियां

​सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास अपराध से अर्जित आय होने और पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, दोनों पटना की उस विवादित जमीन का लाभ उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर साल 2005 से 2014 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान उनके कहने पर हस्तांतरित किया गया था। अदालत ने यह भी माना कि इस पूरी टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में उनका सीधा हस्तक्षेप था।

​होटलों के टेंडर में अनियमितताओं का आरोप

​यह पूरा मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर देने में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दिया गया था। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के चलते कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे लालू परिवार को आर्थिक फायदा हुआ।

​आरोपियों की सूची और कानूनी लड़ाई

​इस मामले में ED ने कुल 16 लोगों और कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, M/s Lara Projects LLP, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, M/s Sujata Hotels, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और M/s Abhishek Finance Private Limited शामिल हैं। इनमें से अदालत ने अब 7 आरोपियों को मुक्त कर दिया है। इससे पहले लालू परिवार ने निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां CBI ने पुख्ता सबूत होने का दावा करते हुए इसका कड़ा विरोध किया था।

​भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा का बयान

​लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले का स्वागत किया है। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार शर्मा ने बयान दिया कि दिल्ली की अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना यह साबित करता है कि यह कोई राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि अदालत का पुख्ता आदेश है।