पटना/नई दिल्ली: भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) घोटाला मामले में आज का दिन बेहद अहम है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट इस चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना फैसला सुनाने वाली है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत परिवार के कई सदस्यों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसा है।
मामले की पृष्ठभूमि और अदालती प्रक्रिया
यह मामला 6 मई को सुनवाई के बाद से ही चर्चा में है, जब अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत ने पहले ही आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट ईडी द्वारा दायर चार्जशीट पर क्या रुख अपनाती है। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में निचली अदालत ने परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए थे, जिसे लालू परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान का है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि रांची और पुरी में स्थित IRCTC के दो होटलों के टेंडर आवंटन में भारी अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर होटलों और उनसे जुड़ी बेशकीमती जमीनों को निजी कंपनियों को लीज पर दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और इसका मुख्य उद्देश्य कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाना था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और CBI का तर्क
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित साजिश करार दिया था। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया था कि टेंडर प्रक्रिया में तत्कालीन रेल मंत्री का सीधा हस्तक्षेप था, जिससे उनके परिवार को आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। वहीं, सीबीआई ने अदालत में स्पष्ट किया है कि उनके पास लालू परिवार के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य और दस्तावेज मौजूद हैं, जो आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
लालू परिवार का बचाव
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार लगातार इन आरोपों को निराधार बता रहा है। लालू यादव ने इसे राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित और उन्हें फंसाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। परिवार का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
आज का अदालती फैसला न केवल कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी व्यापक हो सकते हैं, क्योंकि इसमें बिहार के शीर्ष राजनीतिक परिवार की संलिप्तता का मामला है।

