IRCTC होटल घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 16 आरोपितों की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने आरोप तय करने के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत अब 7 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाएगी कि आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं।
16 आरोपितों के खिलाफ ईडी की अभियोजन शिकायत
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में कुल 16 आरोपितों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत अन्य लोग शामिल हैं।
ईडी का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते IRCTC के होटलों के संचालन और रखरखाव से जुड़े ठेकों में नियमों की अनदेखी की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर कर एक निजी कंपनी को ठेका दिलाया गया।
होटल ठेके के बदले जमीन लेने का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि होटल ठेका दिलाने के बदले करीब तीन एकड़ जमीन एक बेनामी कंपनी के जरिए हासिल की गई। ईडी के अनुसार, इस कंपनी के संबंध लालू यादव के परिवार और उनके करीबी सहयोगियों से जुड़े बताए गए हैं। इसी लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग जांच का अहम आधार माना गया है।
CBI के बाद ED ने संभाली जांच
IRCTC होटल परियोजना में कथित अनियमितताओं की जांच सबसे पहले CBI ने शुरू की थी। इसके बाद अपराध से अर्जित संपत्ति और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।
भ्रष्टाचार मामले में पहले ही तय हो चुके हैं आरोप
इसी मामले से जुड़े भ्रष्टाचार प्रकरण में अदालत पिछले वर्ष अक्टूबर में आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में आरोप तय कर चुकी है। सभी आरोपितों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है। अब मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 7 सितंबर को अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।


