जबलपुर। सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल होने का आरोप झेल रहीं विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता मामले में जबलपुर हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और बहस सुनने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब हर किसी की नजरें कोर्ट के अंतिम आदेश पर टिकी हैं।
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दोनों पक्षों में हुई तीखी बहस, साक्ष्यों पर विचार
हाई कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और अनावेदक दोनों ही पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। अदालत ने मामले से जुड़ी याचिका और उपलब्ध तमाम साक्ष्यों पर गहराई से विचार करने के बाद निर्णय को सुरक्षित रखने का आदेश दिया।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जताई थी कड़ी नाराजगी
आपको बता दें कि इस मामले की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया था। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि आखिर पिछले दो साल से इस गंभीर मामले में विधानसभा स्तर पर कोई अंतिम निर्णय क्यों नहीं हो पा रहा है? तब राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रक्रिया जारी है।
‘मैं अभी भी कांग्रेस में हूं’ – कोर्ट के रिकॉर्ड में सप्रे का बयान है दर्ज
इस कानूनी लड़ाई के बीच सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया था जब विधायक निर्मला सप्रे ने खुद को कागजों पर कांग्रेसी बताते हुए कोर्ट में कहा था कि मैं अभी भी कांग्रेस में ही हूं। हाई कोर्ट ने उनके इस बयान को अपने आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला और उमंग सिंघार के आरोप?
निर्मला सप्रे ने 2023 के विधानसभा चुनाव में सागर की बीना सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और बीजेपी प्रत्याशी महेश राय को 6,155 वोटों से हराया था। इसके कुछ समय बाद लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उनके बीजेपी में शामिल होने की बातें सामने आईं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि उन्होंने बीजेपी के लिए खुलकर चुनाव प्रचार किया जिसके कई वीडियो और सबूत सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।
स्पीकर से कोर्ट तक की लड़ाई
उमंग सिंघार ने मई 2024 में विधानसभा अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर निर्मला सप्रे की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। जब स्पीकर की ओर से कोई फैसला नहीं आया तो सिंघार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस सिलसिले में 22 अप्रैल को विधानसभा में भी सुनवाई हुई थी जहां सिंघार ने स्पीकर को कई अहम दस्तावेज सौंपे थे।
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अब जब हाई कोर्ट ने मामले की पूरी सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया है तो जल्द ही आने वाला अंतिम आदेश यह तय कर देगा कि निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता बचेगी या फिर बीना विधानसभा सीट पर कोई नया सियासी मोड़ आएगा।

