कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल के रजिस्ट्रार को संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की गई है। यह याचिका लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती देते हुए लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई जांच हुई। जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज मानकों पर खरे नहीं उतरे। केवल करीब 245 कॉलेज ही सूटेबल पाए गए। अदालत ने अनसूटेबल और डिसएबल कॉलेजों के छात्रों को परीक्षा में बैठने पर रोक लगा रखी है। सिर्फ सूटेबल कॉलेजों के करीब 8000 छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई है।
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सूटेबल कॉलेजों के परीक्षा परिणाम भी जारी किए जा सकते हैं। अनसूटेबल कॉलेजों की ओर से परीक्षा और परिणाम जारी करने की अनुमति मांगने वाले आवेदन भी अदालत के समक्ष आए थे, लेकिन कोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल रजिस्ट्रार से पूरा रिकॉर्ड मांगते हुए मामले को आगे बढ़ाया है। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हाईकोर्ट की सख्ती जारी है।
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