इंदर कुमार, जबलपुर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से अटकी हुई संवेदनशील ‘प्रमोशन में आरक्षण’ (Reservation in Promotion) के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की सुनवाई अब हाई कोर्ट की नई बेंच द्वारा शुरुआत से फिर से की जाएगी। यह स्थिति तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति होने के चलते बनी है, जिसके कारण पूर्व में पूरी हो चुकी सुनवाई के बाद भी फैसला जारी नहीं हो सका।
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90 दिन में आना था फैसला लेकिन नहीं हो पाए चीफ जस्टिस के साइन
जानकारी के मुताबिक इस महत्वपूर्ण मामले पर हाई कोर्ट में 17 फरवरी को ही अंतिम सुनवाई पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक किसी भी मामले में सुनवाई पूरी होने के अधिकतम 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होता है।
परंतु इस निर्धारित अवधि के भीतर फैसले की कॉपी पर चीफ जस्टिस के हस्ताक्षर नहीं हो सके। नियम यह है कि यदि सुनवाई पूरी होने के बाद ऑर्डर ओपन कोर्ट में जारी नहीं होता या उस पर जजों के हस्ताक्षर नहीं हो पाते हैं तो मामले की दोबारा सुनवाई करना कानूनी मजबूरी बन जाता है।
फैसला न आने से प्रदेश में नियुक्तियां और प्रमोशन पूरी तरह ठप
इस हाई-प्रोफाइल मामले में फैसला अटकने का सबसे बड़ा खामियाजा मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। कोर्ट का अंतिम आदेश न आने के चलते प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर न तो नए प्रमोशन हो पा रहे हैं और न ही नई नियुक्तियां की जा रही हैं।
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दरअसल साल 2022 में प्रमोशन में आरक्षण संबंधी पुराने नियमों को निरस्त किए जाने के बाद से ही राज्य सरकार द्वारा कई विभागों में पदोन्नति और सीधी नियुक्तियों पर रोक लगी हुई है। कर्मचारी संगठन लगातार इस मामले में जल्द फैसले की मांग कर रहे थे, लेकिन अब नई बेंच के सामने दोबारा सुनवाई होने से यह इंतजार और लंबा हो सकता है।
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