Jaipur Digital Arrest: राजस्थान की राजधानी जयपुर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज से 2.50 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने खुद को CBI अधिकारी और रिजर्व बैंक का मैनेजर बताकर जज गणपत सिंह भंडारी को करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। आरोपियों ने हवाला लेनदेन और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए। मामले में बुधवार को ज्योति नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

CBI अधिकारी बनकर आया WhatsApp वीडियो कॉल
पीड़ित रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट जज के भांजे ने ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज कराया है। शिकायत के मुताबिक 28 जुलाई को गणपत सिंह भंडारी के पास एक अनजान नंबर से WhatsApp वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई का CBI अधिकारी बताया। वह पुलिस की वर्दी में नजर आ रहा था। उसने जज से कहा कि 50 करोड़ रुपये का हवाला लेनदेन पकड़ा गया है और इसमें से 40 लाख रुपये कथित तौर पर उनके SBI खाते में जमा किए गए हैं।
गिरफ्तारी का डर दिखाया, परिवार से बात करने पर भी रोक
ठगों ने रिटायर्ड जज को गिरफ्तारी का डर दिखाया। साथ ही उन्हें इस मामले की जानकारी परिवार के किसी सदस्य को नहीं देने की चेतावनी दी गई। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने WhatsApp पर उनसे संपर्क किया और खुद को रिजर्व बैंक का मैनेजर बताया। उसने दावा किया कि हवाला लेनदेन से जुड़ी रकम म्यूचुअल फंड में निवेश की गई है।
वित्तीय निवेश की जानकारी भी मांगी
आरोपियों के दबाव में जज ने अपने म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर साझा कर दी। इसके बाद ठगों ने कहा कि जांच में सहयोग करने के लिए उन्हें अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करनी होगी। इस तरह आरोपियों ने उन्हें लगातार दबाव में रखा।
7 दिन में ट्रांसफर कर दिए 2.50 करोड़ रुपये
शिकायत के मुताबिक, 3 से 10 अगस्त के बीच गणपत सिंह भंडारी ने गांधी नगर स्थित अपने SBI खाते से कुल 2,50,51,000 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए। ठगों ने इस पूरी प्रक्रिया को कथित जांच का हिस्सा बताया और जज को लगातार निगरानी में रखा। करीब 15 दिनों तक चले इस घटनाक्रम के बाद उन्हें ठगी का पता चला और बुधवार को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
अब पुलिस जांच में जुटी
ज्योति नगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाएगी, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई। साथ ही आरोपियों की पहचान और पूरे साइबर नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
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