Jaipuria Hospital VIP Duty Issue: राजस्थान की राजधानी में वीआईपी (VIP) मूवमेंट और रसूखदारों की ड्यूटी ने सरकारी अस्पतालों की कमर तोड़ दी है। शहर के नामचीन राजकीय जयपुरिया चिकित्सालय ने अब साफ कह दिया है कि उनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे हर वीआईपी के पीछे मेडिकल टीमें और एम्बुलेंस दौड़ा सकें।

अधीक्षक ने पत्र लिखकर खड़े किए हाथ
बता दें कि अस्पताल के अधीक्षक और प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीवराज सिंह ने जयपुर-द्वितीय के CMHO को एक कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में सीधा संदेश दिया गया है कि अस्पताल के पास न तो पर्याप्त एम्बुलेंस हैं और न ही इतना मेडिकल स्टाफ कि वे एक साथ कई वीआईपी दौरों को संभाल सकें।
क्या है असली सिरदर्द?
दरअसल, जयपुर में अक्सर एक ही समय पर कई बड़े नेता या वीवीआईपी मौजूद रहते हैं। ऐसे में सीएमएचओ ऑफिस से जयपुरिया अस्पताल पर दबाव बनाया जाता है कि हर जगह मेडिकल टीम और एम्बुलेंस भेजी जाए। अस्पताल का कहना है कि यह व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है। मरीजों के इलाज पर इसका सीधा असर पड़ता है। अस्पताल ने साफ किया कि वे केवल एक वीआईपी को टीम दे पाएंगे।
पुराना वादा भी याद दिलाया
गौरतलब है कि यह मुद्दा नया नहीं है। जयपुरिया अस्पताल ने पिछले साल 3 मई 2025 को भी ऐसा ही पत्र लिखा था। तब यह तय हुआ था कि अगर एक से ज्यादा वीआईपी ड्यूटी आती है, तो अस्पताल सिर्फ ब्लड ग्रुप (रक्त) की व्यवस्था करेगा, बाकी की टीम दूसरे अस्पतालों से बुलाई जाएगी। लेकिन ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, सीएमएचओ ऑफिस लगातार पुराने आदेशों को नजरअंदाज कर अस्पताल पर दबाव बना रहा है।
सिर्फ खून देंगे, एम्बुलेंस नहीं!
अस्पताल प्रशासन ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में अगर एक साथ कई ड्यूटी लगती हैं, तो वे सिर्फ संबंधित वीआईपी का ब्लड ग्रुप उपलब्ध कराएंगे। अस्पताल ने आग्रह किया है कि अन्य चिकित्सा संस्थानों से मेडिकल टीम की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की सुरक्षा में तैनात टीमें खुद को व्यवस्थित करें। आम मरीजों की एम्बुलेंस सेवा में बाधा न आए।
जयपुरिया जैसे बड़े अस्पताल पर सांगानेर, मालवीय नगर और आसपास के बड़े इलाकों का भार रहता है। अगर अस्पताल की एम्बुलेंस और सीनियर डॉक्टर्स सिर्फ वीआईपी प्रोटोकॉल में तैनात रहेंगे, तो इमरजेंसी में आने वाले आम आदमी की जान खतरे में पड़ सकती है। अस्पताल के इस स्टैंड से आम जनता को राहत मिल सकती है क्योंकि अब संसाधनों का इस्तेमाल मरीजों के लिए ज्यादा होगा।
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